क्राइम

हाथरस में मौत का हाहाकार और बाबा कोर्ट की शरण में

हाथरस में मौत का हाहाकार और बाबा कोर्ट की शरण में
रतला। मन, मैला, तन ऊजरा, भाषण लच्छेदार, ऊपर सत्याचार है, भीतर भ्रष्ट्राचार, झूठों के घर बांचे, कथा सत्य भगवान की। जय बोलो बेईमान की। (काका हाथरसी)
मंगलवार को दो दुखद घटनाएं बनाम वारदातों की खबरे मन को झकझौर देने वाली आई। इंदौर के एक आश्रय गृह में बच्चों की मौत जिसने (एनजीओं बना कर भारत के भविष्य की सुरक्षा की जिम्मा लिया और उन्हे असमय मौत की नींद सुला दिया) और हाथरस में 122 की मौत (सरकारी आंकड़ा) ने मन को झकझौर दिया। जिस हाथरस को सारा संसार काका हाथरसी के दोहों के कारण जानता था, आज से वो ही संसार इसी हाथरस के हादसे उर्फ वारदात के कारण जान गया है।
पांखडियों के राज में हर तरफ पांखड का राज है। राजनीति और धर्म के बीच अब चोली दामन का साथ हो गया है। हर सप्ताह, हर माह, हर साल एक पाँखड फैलाने वाला खुद को धर्मामात्मा बता कर हजारों, लाखों की भीड़ भेली कर रहा है। इन पांखडियों के यहां होने वाली भीड़ का लाभ वो नेता उठा रहे है, जो खुद को भगवान की पदवी देने से भी नही चुकते है।
पिछले दो दशक में 2000 हजार से मौते उन धर्मालुओं की हुई है, जो धर्म के नाम पर पांखडियों के डेरों में प्रवचन सुनने जाते रहे या असुरक्षित धर्म स्थलों पर कतार लगाकर भीड़ बढ़ाते रहे हैै।
हाथरस में मची भगदड़ की घटना से पूरे देशवासी  सिहर उठे है,मगर धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों को कोई फर्क नही पड़ा होगा। यहां सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और बाबा का बयान आया कि वो हादसे के समय मौके पर नही थी। जबकि एक सीसीटीवी फुटेज में साफ नजर आ रहा है कि घटना के बाद बाबा अपने काफिले के साथ फरार होकर मेनपुरी तरफ गया है।
हादसे को लेकर नारायण साकार विश्व हरी उर्फ भोले बाबा ने दु:ख जताते हुए एक लिखित बयान जारी किया था. बाबा ने कहा था कि हम मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रभु से प्रार्थना करते हैं. बाबा ने आगे लिखा था कि जब समागम में भगदड़ हुई, उस वक्त वह वहां नहीं थे. वह तो पहले ही निकल चुके थे. उन्होंने बयान में लिखा था कि समागम और सत्संग के बाद अराजकतत्वों ने जिस तरह का काम किया है, उन पर कानूनी एक्शन के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एपी सिंह को आधिकारिक तौर पर अधिकृत किया है.
अब जानते है, धर्म के प्रति आस्था रखने वालों का हश्र और सरकार और वहां के प्रशासन की नाकामी या अनदेखी
1- 2003 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में कुंभ मेले में पवित्र स्नान के दौरान भगदड़ मच गई. इसमें 39 लोग मारे गए और 140 घायल हुए।
2- 2003 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में कुंभ मेले में पवित्र स्नान के दौरान भगदड़ मच गई. इसमें 39 लोग मारे गए और 140 घायल हुए.
3- 2005 को महाराष्ट्र के सतारा जिले में मंधारदेवी मंदिर में वार्षिक तीर्थयात्रा के दौरान 340 से अधिक श्रद्धालुओं की कुचलकर मौत हो गई. सैकड़ों लोग इसमें घायल हुए।
4-2008 को हिमाचल के बिलासपुर जिले में नैना देवी मंदिर में चट्टान गिरने की अफवाहों के कारण भगदड़ मच गई. इसमें 162 लोग मारे गए, 47 घायल हुए।
5- 2008 को जोधपुर शहर में चामुंडा देवी मंदिर में बम विस्फोट की अफवाहों के कारण भगदड़ मच गई. इसमें लगभग 250 भक्त मारे गए और 60 से अधिक घायल हुए।
6- 2010 को यूपी के प्रतापगढ़ जिले में कृपालु महाराज के राम जानकी मंदिर में भगदड़ में लगभग 63 लोग मारे गए. लोग स्वयंभू भगवान से मुफ्त कपड़े और भोजन लेने के लिए एकत्र हुए थे।
7-2011 में केरल के इडुक्की जिले के पुलमेडु में एक जीप के घर जा रहे तीर्थयात्रियों से टकराने से भगदड़ मच गई. इसमें 104 भक्त मारे गए व 40 से अधिक घायल हुए।
8-  2011 में हरिद्वार में गंगा नदी के किनारे हर-की-पौड़ी घाट पर अचानक से भगदड़ मची. इसमें 20 लोग मारे गए।
9- 2012 में पटना से बहने वाली गंगा नदी के किनारे अदालत घाट पर छठ पूजा के दौरान  अस्थायी पुल के ढह जाने से 20 लोगों की मौत हो गई।
10- 2013 में मध्यप्रदेश के दतिया के रतनगढ़ मंदिर में 115 लोग मारे गए और 100 से ज्यादा सैकड़ों लोग घायल हुए।
11- 2014 को पटना के गांधी मैदान में भगदड़ मची. इसमें 32 लोगों की मौत हो गइ, और अनेक लोग घायल हुए।
12- वर्ष 2015 में आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी में गोदावरी नदी के तट पर भगदड़ मची. इसमें 27 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई।
13- 2022 में माता वैष्णो देवी मंदिर में हुई भगदड़ के कारण 12 लोगों की मौत हो गई।
14- गत वर्ष 2023 को इंदौर महानगर में आयोजित हवन के दौरान  प्राचीन ‘बावड़ी’ (कुएं) के ऊपर बनी स्लैब के ढह जाने से 36 लोगों की मौत हुई।
और अब… हाथरस से आई ये दुखद खबर.. बताती है, जताती है कि अब धर्म सभाए, धर्म स्थल भी गैस गोदाम, पटाखा कारखाने आदि की तरह विस्फोटक होते जा रहे है। आस्था का सैलाब जारी रहे, मगर शासन-प्रशासन भी इस सैलाब पर काबू पाने का माकूल और पुख्ता इंतजाम करे, वरना धर्म का राजनीति के लिए लाभ उठाने वाले हाथरस के हाहाकार और मौत के प्रवचनों पर अपनी राजनीति चमकाते रहेगे, स्वयंभूओं उर्फ दुराचारियों की छवि का लाभ उठाते रहेगे और भोले भक्त मौत की आगोश में समाते रहेगे।
काका हाथरसी सही कह गए है कि.. प्रजातंत्र के पेड़ पर कौआ करे किलोल।
टेप रिकार्डर में भरे चमगादड़ के बोल। नित्य नई योजन बन रही, जन-जन के कल्याण की , जय ..बोलो बेईमान की।

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