हर 1 मिनिट में 3 बाल विवाह हो रहे है !

आखातीज और बंसत पंचमी सहित अन्य ऐसे ही कुछ मौकों पर होने वाले विवाह आयोजनों के दौरान बाल विवाह रोकथाम के लिए चलाए जाने वाले अभियान को आयोजित करने वालों की कार्यप्रणाली इस बात से पता चल रही है कि देश में हर एक मिनिट में तीन बाल विवाह हो रहे है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट इसका अर्थ यह है कि देश में रोजाना 4320 बाल विवाह होते हैं, जबकि मामले सिर्फ 3 दर्ज होते हैं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के हालिया जारी आंकड़े बताते हैं कि 2021 के मुकाबले 2022 में बाल विवाह के मामले दर्ज होने की संख्या पांच फीसद और घटी है। देश में 2021 में बाल विवाह के 1050 मामले दर्ज किए थे, जबकि 2022 में 1002 मामले ही दर्ज किए गए।
इधर राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-21) के अनुसार भारत में बाल विवाह की मौजूदा दर 23.5 फीसदी है। देश के 257 जिलों में बाल विवाह की दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। बाल विवाह बच्चों से बलात्कार है। इसका नतीजा बाल गर्भावस्था के रूप में सामने आता है जो जच्चा-बच्चा दोनों के लिए जानलेवा हो सकता है।
देश को 2030 तक बाल विवाह से मुक्त कराने के लक्ष्य के साथ 160 से ज्यादा गैर सरकारी संगठनों के गठबंधन द्वारा महिलाओं की अगुआई में देश के 300 जिलों में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में तब अप्रत्याशित मोड़ आया जब अक्टूबर में 17 राज्यों की सरकारों ने बाल विवाह के खिलाफ युद्ध जैसा रुख अपनाते हुए अपने राज्यों में विभिन्न विभागों और उनके अफसरों व कर्मियों को इसके खात्मे के प्रयासों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने का निर्देश दिया।
बहरहाल बाल विवाह को लेकर जारी आंकड़े उन विभागों और सरकारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे है जो विभिन्न तरीकों से बाल विवाह रोकने का प्रयास करते है, या आमजन को अपने कागजी अभियानों से ये जताने का प्रयास करते है कि हम बाल विवाह मुक्त करने की दिशा में काम कर रहे है।
