जनसेवा देशभक्ति: आरोपित को फरियादी बनाकर किया कानून का पालन

रतलाम
जनसेवा देशभक्ति के मायने बदलने लगे है, अब सेवा और भक्ति उसी की होती है, जो राजनीतिक या दबाव-प्रभाव का रसूख रखता है। तितरी-मथुरी क्षेत्र से जुड़ी करोड़ों की जमीन घोटाले में मामले में जनसेवा करने वालों ने चार माह बाद खेल खेलते हुए आरोपित को फरियादी बनाते हुए अपने दायित्व की पूर्ति कर दी, जमीन बेचने वाला इसका परिवार और दो गवाह को जांच में दोषी पाया गया है, वही इसी षडय़ंत्र में शामिल कुछ लोगों को भी जीवनदान दे दिया। पुलिस की इस कथित बारिक जांच के बाद शनिवार को इस पूरे मामले में जमीन के खरीदार को फरियादी बना कर हरमीतसिंह ओबेराँय सहित चार लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी बाहर आई है। इनमें से दो को हिरासत में लिया गया है, वही दो लोग फरार बताए जा रहे है।
मामला इन्दौर निवासी जरनैल कौल की उस शिकायत से जुड़ा है, जो जनवरी माह में रतलाम कलेक्टर और एसपी को की गई थी। इस शिकायत में फरियादी जरनैल कौर ने जिला और पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों को अवगत कराया था कि ग्राम तितरी में स्थित इनकी जमीन भूमि खसरा नम्बर-385,1 रकबा 0.500 अमित पिता विजय सेठी निवासी विक्रम मार्ग खाचरौद ने खरीद ली है। इस जमीन को फर्जी वसीयत व अन्य दस्तावेजों के आधार पर रतलाम के शास्त्रीनगर निवासी हरमीतसिंह ओबेराँय व इसके साथियों ने बेची है। जरनेल कौर ने अपनी शिकायत में नायब तहसीलदार, पटवारी सहित उन लोगों को भी इस फर्जीवाड़े में दोषी बताया था, जिन्होने फर्जी वसीयत, जरनैल कौर का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वाले निगमकर्मी आदि को आरोपित बनाने का निवेदन किया था।
मामले की थाना माणकचौक में चली और चार माह चलती ही रही। शनिवार को इस शिकायत का निराकरण होना था और उम्मीद की जा रही थी कि इस महाघोटाले में जमीन को बेचने और खरीदने वालों के साथ ही सहयोग करने वाले भी पुलिस की जांच में दोषी पाए जाएगे।
इस पूरे प्रकरण में पीडि़त महिला जनरैल कौर भान की तरफ से इंदौर के एडवोकेट राजेन्द्र कुमार गुप्ता ने इस पूरे मामले की मय सबूतों के साथ शिकायत प्रस्तुत की थी, मगर इस पुलिस की जांच में पूरा खेल ही पलट गया और जिसे फरियादी ने आरोपित बनाने के लिए शिकायत की थी, उस जमीन के खरीदार को पुलिस ने फरियादी बना कर हरप्रीत ओबेराँय, इसके परिजन और जमीन बिक्री के दस्तावेजों में गवाह बने दो लोगों को दोषी ठहरा दिया है। इसमें पटवारी, नायब तहसीलदार, शिकायत कर्ता का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वाले जांच में दोषी नजर नही आना बताए जा रहे है।
बहरहाल न्याय के रक्षक और जनसेवा देशभक्ति के प्रतीक लोगों के जानमाल की सुरक्षा करने वाले जवानों ने जांच किस तरह की? किसके दवाब-प्रभाव, रसूख को देखकर जरनैल कौर की जगह जमीन के खरीदार को ही फरियादी बना दिया। यह आने वाले समय में पता चलेगा।
