क्राइम

125 फर्जी पोर्टल व वेबसाइट्स पर बन रहे है, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र

आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग ने जिलों के कलेक्टर को रोकथाम कर आमजन को सचेत करने के निर्देश दिए

रतलाम(अनिल पांचाल)
शहर के बाजना बस स्टेण्ड क्षेत्र में बने फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले में पुलिस ने दो लोगों को खिलाफ कायमी करते हुए प्रमाणपत्र बनाए जाने में प्रयुक्त सामग्री भी बरामद की है। रतलाम शहर सहित जिले की स्वास्थ्य संस्थाओं और नगरीय निकायों के माध्यम से बनने वाले ऐसे प्रमाणपत्र अब आँन लाईन सेंटरों पर धडल्ले से बनाए जा रहे है और इसमेें फर्जी वैबसाईट और पोर्टलों का इस्तमाल किया है। इसे लेकर एक माह पूर्व ही आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग ने रतलाम सहित प्रदेश के तमाम जिलों के कलेक्टरों को एक पत्र के माध्यम से अवगत करा चुका है कि रतलाम सहित प्रदेश भर में लगभग 125 से ज्यादा फर्जी पोर्टल व वेबसाइट्स के माध्यम से जन्म और मृत्यु के प्रमाण पत्र बनाए जा रहे है।
मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) एवं आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी म.प्र. ऋषि गर्ग ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को फर्जी पोर्टल व वेबसाइट्स के माध्यम से होने वाले इस गौरखधंधे को रोकने और इसके प्रति आमजन को जागरुक करने के निर्देश दिए है।
इसी मामले में भारत सरकार गृह मंत्रालय सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य पंजीयकों को जन्म और मृत्यु पंजीकरण के लिए फि़शिंग में लिप्त फर्जी पोर्टल/वेबसाइट्स की रोकथाम की हिदायत दी है। उन्होने राज्य सरकार व जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए है कि वे फर्जी वेबसाइटों और पोर्टलों के जरिए जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्रों से संबंधित धोखाधड़ी से बचने के लिए सावधानी बरतें। उन्होने बकायदा फर्जी वैबसाईट्स व पोर्टलों की सूची भी जारी की है।
जैसा कि आप जानते हैं, यह कार्यालय जन्म और मृत्यु पंजीकरण हेतु एक केंद्रीय पोर्टल का संचालन कर रहा है, जिसे 25 राज्यों/ञ्जह्य ने अपनाया है। यह देखा गया है कि कुछ फर्जी वेबसाइटें, जो असली वेबसाइट जैसी प्रतीत होती हैं, यूआरएल के ज़रिए संचालित हो रही हैं और जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नाम पर धोखाधड़ी कर रही हैं।
संयुक्त निदेशक (सीआरएस) ए. के. पांडेय के अनुसार इन वेबसाइट्स का संचालन उचित जानकारी और स्वीकृति के बिना किया जा रहा है, और इनका उद्देश्य आम जनता को धोखा देना है ताकि वे जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जैसी संवेदनशील जानकारी प्रदान करें। इसके अतिरिक्त, ये वेबसाइटें यूजऱ आईडी और पासवर्ड जैसी जानकारियाँ चुराकर उनका दुरुपयोग कर सकती हैं।
उन्होने बताया कि सभी राज्य सरकारों और प्रशासकों से अनुरोध है कि वे यह सुनिश्चित करें कि पंजीकरण सॉफ़्टवेयर या पोर्टल में सही और पूर्ण क्ररु ही दर्ज किया जाए और उपयोगकर्ता केवल अधिकृत वेबसाइट का ही उपयोग करें।
संयुक्त निदेशक (सीआरएस) ए. के. पांडेय के अनुसार राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र भारत सरकार द्वारा नियमित रूप से सूचित किया गया है कि कुछ संदिग्ध डोमेन इंटरनेट पर बनाए गए हैं, जिनका यूआरएल की आधिकारिक वेबसाइट के समान है और संभवत: उनका उपयोग दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।
यदि कोई वेबसाइट/डोमेन पाया जाता है जो राज्य से संबंधित फर्जी जन्म/मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर रहा है, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अंतर्गत ऐसे अधिकृत न किए गए डोमेन/व्यक्तियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए जो इस प्रकार की धोखाधड़ीपूर्ण गतिविधियों में लिप्त हों।

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