सोशल मीडियां: सेव, सोना और साड़ी के साथ अब शरीर की प्रचार….

रतलाम। सेव, सोना और साड़ी के लिए विख्यात रतलाम जिले के जावरा विकासखण्ड का कुछ हिस्सा देश भर में देह व्यापार के लिए प्रचारित हो रहा है।
पहले से ही सेव, सोना और साड़ी व्यापार से जुड़े व्यापारी अपनी दुकान, संस्थान या शोरुम के प्रचार के लिए लिए सोशल मीडिया को माध्यम बनाते रहे है, मगर अब देह की नुमाईश और इस व्यापार से जुड़ी अनेक महिलाए और युवतियों ने फेसबुक, इस्टाग्राम, स्नेपचेट, ट्वीटर पर अपने अनेकों अकाउंट बना रखे है, जिस पर ये रील बना कर पोस्ट करती है। इन रीलों को देखने के बाद यहां देश के अनेक राज्यों से रसिक लोग पहुच रहे है।
आज ढोढर, परिवलिया सहित समीपस्थ गांवों में होने वाले देह व्यापार की जानकारी सोशल मीडिया पर आसानी से उपलब्ध हो रही है। इसी क्षेत्र में रहने वाली एक बाछड़ा बाला ने फेसबुक, इस्टाग्राम, स्नेपचेट, ट्वीटर पर अपने 10 से ज्यादा अकाउंट बना रखे है, जिस पर यह हर दिन एक रील पोस्ट की जाती है। धीरे-धीरे इसकी रील इतनी ख्यात हुई कि ढोढर, परिवलिया सहित अन्य ऐसे गांव देशभर में विख्यात हो गई। जब देह व्यापार से जुड़े परिवार की इस युवती ने अपनी देह के प्रचार के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया तो अन्य युवतियों व महिलाओं ने भी इस्टाग्राम, फेसबुक सहित अन्य माध्यमों पर अपना और अपने गांव का प्रचार करना शुरु कर दिया। आज हालात यह है कि रतलाम नीमच से गुजरने वाले राहगीर यहां आकर मौज मस्ती करने आ रहे है। सोशल मीडिया पर इन डेरों व देह व्यापार करने वाली महिलाओं का प्रचार प्रसार तेज होने लगा तो प्रदेश व देश के अन्य हिस्सों से भी महिलाएं इन डेरों या आसपास के गांवों में बस कर देह व्यापार को बढ़ावा दे रही है। पुलिस ने इन डेरों पर निगरानी के लिए कैमरे तो लगवा दिए है। मगर सोशल मीडिया पर फलते फूलते देह व्यापार को रोकने के लिए सायबर टीम सक्रिय नही होना बताई जाती है। ऐसे में सोशल मीडिया के माध्यम से देह का प्रचार जारी है और प्रदेश व देश के विभिन्न जिलों से युवा और रसिक लोग यहां पहुच रहे है।
ढोढर, परिवलिया, चिकिलाना, माननखेड़ा सहित आधा दर्जन गांवों में कुछेक महिलाएं देह व्यापार करती थी। घर की बुजुर्ग महिला इन इन बालाओं की दलाली करती रहती थी, और इनका धंधा सुकुन चैन से चलता रहा है। मगर जैसे-जैसे वर्ष बीतते गए वैसे-वैसे इन गांवों का धंधा हाईटेक होने लगा है। आज झोपड़ों और टूटे मकानों की जगह एसी युक्त कमरे है, जिनमें वो सभी सुविधाएं उपलब्ध है, जो अय्यासी के दौरान उपयोग की जा सकती है। पुलिस ने यहां सीसीटीवी कैमरों से निगरानी शुरु की तो स्थानीय लोगों की आवाजाही तो कम हुई, मगर अन्य जिलों के रसिकों की भीड़ तेजी से बढऩे लगी है।
होटलों में कार पार्किग और डेरों में मस्ती
एक समय था जब जावरा से ढोढर के बीच कुछ होटले हुआ करती थी, वही बांछड़ा परिवार की महिलाएं व युवतियों का डेरों से निकलना वर्जित था। मगर आज हालात बदले हुए है, आज जावरा से ढोढर के बीच अनेक होटले व गेस्ट हाउस निर्मित हो चुके है। शनिवार-रविवार को इन होटलों में ठहरने वाले लोगों का तांता लगा रहता है। ये अपने चार पहिया वाहन होटलों के बरामदों में खड़े करते है और डेरों में पहुच जाते है। कई लोग इनके दलालों से सम्पर्क कर इन्हे बाछड़ा डेरों से रतलाम शहर, इन्दौर सहित अन्य जिलों में भी ऊंचे दाम देकर ले जाते है और छोडऩे भी आ जाते है। ग्राहकों को बुलाने और युवतियों के चित्र उपलब्ध कराने वाले दलाल भी इन्ही गांवों के रहने वाले बताए जाते है।
देह के धंधे में रसूखदारों का संरक्षण
देह के इस धंधे को समाजसेवी, नेता, ठेकेदार, प्रापर्टी के दलाल आदि का भी संरक्षण मिलने लगा है। इन रसूखदारों ने अपने शौक मौज के लिए डेरों की किसी न कीसी महिला को संरक्षण दे रखा है, यह महिलाएं इन्ही रसूखदारों के इशारों पर आती-जाती है। ऐसे में इन पर कोई हाथ डालने का प्रयास भी नही करता है। इन्ही डेरों की महिलाएं व युवतियां अन्य जिलों की महिलाओं से भी सम्पर्क कर उन्हे देह व्यापार के लिए प्रेरित करती आ रही है।
50 से ज्यादा महिलाएं संक्रमित ?
ढोढर सहित अन्य बांछड़ा बस्तियों में 50 से ज्यादा महिलाएं एचआईव्ही संक्रमित बताई जा रही है। इन सभी का इलाज जिला अस्पताल रतलाम, सिविल हास्पीटल जावरा और ढोढर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर चलना बताया जाता है। जानकारों की माने तो इस रोग की जानकारी गोपनीय रखी जाती है, ऐसे में संक्रमित महिलाएं व युवती आज भी अपने धंधे को छोडऩे को तैयार नही है।
