लैला की हवस ने बच्चे से किया प्यार, लैला ने पुलिस से जोड़े तार , अब दर्ज हुई एफआईआर

रतलाम
26 साल की लैला (परिवर्तित नाम) का दिल एक 15 साल के बच्चे पर आ गया। लैला ने बच्चे का जमकर शारीरिक शोषण किया और जब लैला के पति और ससुर को इसकी करनी का पता चला तो लैला ने पुलिस से गठजोड़ कर बच्चे के खिलाफ कायमी करवा दी। हमारी रतलाम पुलिस भी इतनी भोली है कि लैला की कीमती झुमके पर फिदा हो गई और हवसी लैला की शिकायत पर बच्चे पर ही दुष्कर्म का प्रकरण दर्ज कर बच्चे को 12 दिन सरकारी मेहमान (बाल सम्प्रेक्षण गृह) का मेहमान बना बैठी।
ऐसे में बच्चे की मां ने पहले खुद इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, जब जिम्मेदार नही माने तो अधिवक्ता अमित पांचाल की शरण ली। बाल कल्याण समिति का दरवाजा खटखटाया, तब पुलिस को अपनी जिम्मेदारी समझ आई और मामले में एफआईआर दर्ज की गई है।
शहर के वीरियाखेड़ी निवासी विवाहिता होकर दो बच्चों की मम्मी उर्फ लैला इसके पति और ससुर के खिलाफ पुलिस ने लैगिक अपराधों से बालक का संरक्षण अधिनियम 2012 और बीएनएस (2023) की लगभग 9 धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। आरोपित लैला, उजाला, सफेद (काल्पनिक नाम) है।
महिला पुलिस थाना व्दारा 26 साल की महिला की शिकायत पर 15 साल के नाबालिग पर रेप की एफआईआर दर्ज करने का मामला सामने आने के बाद पीडि़त बालक की मां व्दारा पुलिस अधीक्षक, विशेष किशोर पुलिस युनिट, बाल कल्याण समिति को की गई शिकायत पर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं होने पर पीडि़त बालक की मां की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार पांचाल व्दारा किशोर न्याय अधिनियम के तहत प्रिंसीपल मजिस्ट्रेट, किशोर न्याय बोर्ड को प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीबध्द करवाए जाने व उक्त रिपोर्ट दर्ज न किए जाने वाले सम्बन्धितों पर पृथक से एफआईआर दर्ज किए जाने का आवेदन पेश किया गया है।
उल्लेखनीय है कि दिनांक 17 अप्रेल 2025 को महिला पुलिस थाना पर विरियाखेड़ी इलाके में रहने वाली एक महिला जो स्वयँ दो बच्चों की मां है, की ओर से इस आशय की एफआईआर दर्ज की गई कि 15 मार्च 2025 से 16 अप्रेल 2025 तक उसके साथ रेप किया गया। इस एफआईआर के आधार पर महिला थाना व्दारा 15 वर्षीय नाबालिग को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया और वहां उक्त बालक करीब 12 दिनों तक रहा।
पीडि़त बालक की ओर से उसकी मां व्दारा अधिवक्ता के माध्यम से प्रिंसीपल मजिस्ट्रेट, किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष आवेदन पत्र प्रस्तुत कर बताया गया है कि पीडि़त बालक व उसकी मां व्दारा महिला थाना प्रभारी को सम्पूर्ण घटनाक्रम बताए जाने के बाद भी उनके व्दारा उसके पुत्र के साथ हुई घटना की एफआईआर दर्ज नहीं की गई और उक्त महिला, उसके पति और ससुर व अन्य को बचाने के लिए उसके पुत्र के खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज की गई। उक्त बालक को गिरफ्तार कर किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किए जाने पर भी उसके व्दारा घटनाक्रम बताया गया लेकिन इसके बाद भी उक्त बालक के साथ हुए घटनाक्रम की एफआईआर दर्ज नही की गई है। पीडि़त बालक की मां व्दारा बाल कल्याण समिति, विशेष किशोर पुलिस युनिट, पुलिस अधीक्षक को दी गई शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं की जाकर मात्र कागजी खानापूर्ति किए जाने से पीडि़त बालक और उसकी मां व्दारा काफी परेशानी उठाई गई। बालक की मां व्दारा पुलिस अधीक्षक, विशेष किशोर पुलिस युनिट, बाल कल्याण समिति रतलाम पर भी मेरे पुत्र के साथ हुए घटनाक्रम की एफआईआर दर्ज किए जाने का निवेदन किया गया लेकिन कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई इसलिए किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के तहत तत्काल पीडि़त बालक के साथ हुए घटनाक्रम के आधार पर तत्काल अपराध दर्ज किए जाने व एफआईआर दर्ज न करने वाले सभी सम्बन्धितों के विरुध्द पृथक से अपराध दर्ज किए जाने का आदेश दिया जावे। उक्त आवेदन पत्र पर किशोर न्याय बोर्ड के प्रिंसीपल मजिस्ट्रेट व्दारा महिला थाना, पुलिस थाना औद्योगिक क्षेत्र व अभियोजन को उक्त आवेदन पर अपना प्रतिवेदन दिए जाने हेतु 20 जून तक का समय दिया गया था। इसके बाद पुलिस को अपने दायित्व समझ आए और अब वहसी लैला सहित तीन लोगों के खिलाफ कायमी की गई है।
