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एमपी-43 फूड प्लाजा: 13 दुकानों पर निवेशकों ने लगाया लंबा दांव जो बना नाराजगी का कारण

रतलाम। इन्दौर की 56 दुकानों की तर्ज पर रतलाम के गुणवत्तायुक्त खानपान के शौकिनों के लिए नगर निगम ने एमपी-43 फूड प्लाजा का प्रयोग कर निगम की आय में भी जमकर इजाफा किया है। ई निविदा के दौरान यहां 13 दुकानों पर निवेशकों ने लम्बा दांव लगाया है। वही आधा दर्जन से ज्यादा भाग्यशाली निवेशक सिंगल टेंडर का हिस्सा बने है। फूड प्लाजा की दुकाने जरुरतमंद व्यापारियों के लिए निर्मित की गई थी, मगर इसमें निवेशकों के घुसने से निगम परिषद के सदस्यों में भी नाराजगी उभर कर सामने आई है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार फूड प्लाजा की दुकान नम्बर – 3,7,8,17,18,23,27,28,37,40,41, और 43 पर निवेशकों ने 30 लाख रुपए से अधिक की राशि का दांव लगाया है।
दुकान नम्बर-1 आरक्षित थी, मगर निविदा भरने वाले दस्तावेज की कमी की जिसके कारण यह दुकान फिलहाल स्थगित की गई है। इसी तरह दुकान नम्बर-6,11,12,16,19,30,32,34 के लिए सिंगल टेंडर डाले गए है और लगभग इन निवेशकों को ही यह दुकाने आंवटित की जाएगी।
फूड प्लाजा की दुकान लेने वालों में पश्चिमी दिल्ली से लेकर मध्यप्रदेश के कई शहरों के व्यापारियों ने हिस्सा लिया है। वही रतलाम निवासी किसी सांखला ने आधा दर्जन से ज्यादा दुकानों पर करोड़ों का दांव लगाया है। इस निवेशक ने फूड प्लाजा मार्केट की मौके की दुकानों के साथ ही अगल बगल की दुकानों के लिए भी 30 लाख रुपए से अधिक की बोली लगाई है, जो अन्य निविदाकारों के लिए संशय की स्थिति बनी हुई है।
जिन निवेशकों ने टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लिया है और जिन्हे दुकाने आंवटित की जाना है,उन्हे आगामी 21 दिनों में दुकान खरीदी के लिए 25 प्रतिशत राशि जमा कराना है। अगर मार्केट की कई दुकानों पर लम्बा दांव लगाने वाला निवेशक एक दो दुकाने ही लेकर पैर पीछे खीच लेता है तो इन दुकानों का आंवटन झमेले में पढ़ सकता है, यह भी तय है। क्यूकि नगर निगम प्रशासन में बैठे ज्ञानवान अफसरों ने निविदा में तमाम शर्त तो रख दी मगर एक शर्त रखना भूल गए कि एक निविदाकार कम से कम सिर्फ एक या दो दुकानों के लिए निविदा भर सकता है। अफसरों की इस गलती के चलते जरुरतमंद निविदाकारों को यह दुकाने आंवटित नही हो पाएगी और निवेशक इन दुकानों की खरीदी कर जरुरतमंद व्यापारियों से लम्बा माल जीमने का प्रयास करेगा।
फूड प्लाजा मार्केट की दुकानों पर एक ही निवेशक के कई दुकानों पर दांव लगाने के मामले में नगर निगम परिषद के सदस्य अब नाराजगी जाहिर कर रहे है।
बहरहाल,, लगभग 4 करोड़ की लागत से बने एमपी-43 फूड प्लाजा की फिलहाल पौ बारह है। यह निगम का पहला ऐसा मार्केट है जिसके निर्माण के लिए अनुमति भी ली गई थी, यानि सभी तरह की कार्रवाई वैध तरह से करने का प्रयास किया है। निविदा खोलने वाली समिति में कुछ गैलियों के कारण मामला खटाई में होता दिखाई दे रहा था, मगर इसी समिति के कुछ समझदारों ने खण्डवा नागदा और हर फाईल को अटकाने भटकाने वालों की नही चलने दी, लेकिन फिर ये मार्केट की दुकानों के आंवटन में रोड़ा बन सकते है।

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