क्राइम

व्हाटशाँप पर मैसेज भेजा…. तुम्हारे परिवार का समाजिक बहिष्कार किया गया

रतलाम
बीति 31 मार्च 2026 को एक समाज के व्हाटशाँप ग्रुप पर समाज के ही एक परिवार के लिए मैसेज वायरल हुआ जिसमें उल्लेख किया गया था कि पहले तो सिर्फ ट्रस्ट से निष्कासन किया अब तो सारे सम्बन्ध ही विच्छेद किये जायेंगे यानि की सामाजिक बहिष्कार किया।
इस मैसेज का समाज के ही कुछ लोगों ने समर्थन किया और इसके बाद से समाज के एक परिवार का समाज से बहिष्कार कर दिया गया। मामले की शिकायत मंगलवार को जिला और पुलिस प्रशासन को की जाकर दोषियों पर उचित कार्रवाई की मांग की गई है।
रतलाम शहर के बजाजखाना क्षेत्र में रहन वाले दिलीप पिता धर्मचंद पोरवाल ने शिकायत दर्ज कराई है कि श्री वीसा पोरवाल (जैन) समाज के व्हाट्सअप ग्रुप जिसमे 185 मूल सदस्य है जो सम्पूर्ण समाज में सूचना का माध्यम है, इस ग्रुप में दिनांक 31 मार्च गुरुवार को रात्रि 8 बजे समाज के ही निलेश पिता राजकुमार
पोरवाल द्वारा समाज से बहिष्कृत करने का मैसेज लिखा गया। इस मैसेज के बाद ही समाज के नीलेश,संजय, स्मिता पोरवाल, विशाल, नीतेश, नरेन्द्र, राकेश, दिलेश सहित आठ लोगो ने हमारे सामाजिक बहिष्कार करने का निर्णय और समर्थन किया है।
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि भारतीय संविधान की धारा 14-19-21 के तहत हर नागरिक को समानता और सम्मान के साथ में जीने का अधिकार है प्रासंगिक क़ानूनी धाराये 2023 हर जगह लागु हो चुकी है ऐसे में भारत में किसी को भी सामाजिक बहिष्कार की धमकी देना कानूनी रूप से गलत है। यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाता है, इसके खिलाफ कड़े कानून हैं। मध्य प्रदेश में, यहाँ की कानूनी व्यवस्था भारतीय न्याय संहिता और संवैधानिक अधिकारों पर आधारित है।
सामाजिक बहिष्कार एक अपराध मध्य प्रदेश में इसके लिए विशेष कानून हैं, इसे आपराधिक धमकी माना जाता है। किसी को समाज से अलग करने की धमकी देना गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। यदि भेजने वाला किसी संस्था या समाज का हिस्सा है, तो आप पंजीयक लोकन्यास के सामने विरोध दर्ज कर सकते हैं, किसी भी पंचायत या समिति को किसी का सामाजिक बहिष्कार करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
शिकायत में बताया गया है कि समाज के कुछ लोगो के द्वारा ईष्र्याग्रस्त ही सतत हमारे प्रति नकारात्मक टिप्पणी एवं लांछन लगाये आते हैं। लगभग एक माह पूर्व हमारे द्वारा जिलाधीश, पुलिस अधीक्षक, थाना माणक चौक में लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई थी, इसके परिणाम स्वरूप हमारा सामाजिक बहिष्कार कर समाज के कार्यक्रमों की सूचना बंद कर दी गयी।
शिकायतकर्ता ने जिला और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि भारत की संवैधानिकता की चुनोती देने वालो और सामजिक बहिष्कार जैसी कुरुतियो को बढ़ावा देने वाले, सम्पूर्ण ज्ञान होने के पश्चात भी आपराधिक कृत्य करने वालों पर उचित वैधानिक कार्यवाही कर हमारी सामाजिक प्रतिष्ठा और सम्मान की रक्षा करते हुए उक्त कृत्य करने वालों पर दण्डात्मक कार्रवाई की जाए।

Related Articles

Back to top button