नामली: हंगामे के बीच लाईन हाजिर से संभाला मोर्चा तो बढ़ा बवाल

रतलाम
नामली थाना क्षेत्र के ग्राम पल्दूना हाईवे पर हुई सडक़ दुर्घटना के बाद उपचार के दौरान 50 वर्षीय मुकेश कुमावत की मौत के इनके परिजनों व समर्थकों ने हाईवे पर गुस्सा जताते हुए यही पर मृतक का अंतिम संस्कार करने की तैयारी की वही जिला और पुलिस प्रशासन के जिम्मेदारों ने आक्रोषित लोगों को शांत करने का प्रयास किया। मौके पर एसडीओंपी सहित अन्य अन्य पुलिसकर्मी भी इस हंगामे को जैसे-तैसे निपटाने का प्रयास कर रहे थे।
शुक्रवार से शुरु हुआ यह हंगामा शनिवार सुबह तक भी चला और अब यह गुस्सा किसी समाज, परिवार विशेष का नही होकर नामली के सर्वजन समाज का हो चुका था। परिजन मृतक का अंतिम संस्कार हाईवे पर ही करने की तैयारी कर मृतक के परिजनों को 1 करोड़ की मांग और किसी सदस्य को नौकरी देने की बात पर अड़े हुए थे।
मामला गर्माया हुआ था और इसी दौरान आला अधिकारियों ने हवालात में हुई मौत के बाद लाईन हाजिर कर्मचारी को मौके पर भेज कर इस आंदोलन को शांत करने का प्रयास किया। इसमें दलील ये भी दी गई कि नामली के नेता, अभिनेता, समाजसेवी आदि लाईन हाजिर कर्मचारी के सम्पर्क में है और हंगामा शांत हो जाएगा। मगर हुआ उल्टा ही और इस विरोध प्रदर्शन के दौरान लाईन हाजिर कर्मचारी के पहुचते ही भीड़ बढऩे लगी। देखते देखते यह आंदोलन सभी समाजजनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया। कई नेता मौके पर पहुच गए और भाषणबाजी कर जिम्मेदारों को खरी खोटी सुनाने लगे। एक नेता ने जिम्मेदारों के मुंह पर बोल दिया कि अगर सुनने की क्षमता हो तो यहां खड़े रहो… वरना भाग जाओं। जिम्मेदारों को मिल रही इस चेतावनी के दौरान डीएसपी और एसडीओपी जैसे वरिष्ठ अधिकारी लाईन हाजिर कर्मचारी के पीछे खड़े नजर आ रहे थे।
नामलीवासियों का कहना है कि लहसुन व्यापारी शिवम की संदिग्ध मौत, गोदाम पर हुए हंगामे से लेकर इसके परिजनों पर प्रकरण दर्ज किए जाने के मामले को लेकर अभी भी जनता में गुस्सा है। हवालात में हुई मौत की जांच जारी है। ऐसे में लाईन हाजिर कर्मचारी को मुकेश कुमावत की मौत के बाद चल रहे हंगामे के बीच क्यू भेजा गया,यह समझ से परे है। बहरहाल नामली के नेता, अभिनेता, समाजसेवी, व्यापारियों आदि वही करते है, जो वो चाहते है। ऐसे में वह शुरु भी खुद ही होते है और रुकते भी खुद ही है।
