संदिग्ध मौत, पुलिस की ढिलाई.. हाईकोर्ट ने मांगा कार्रवाई का स्टेट्स
मामला 2022 का, मृतक की माँ ने मांगा न्याय

रतलाम।
प्रदेश की कानून व्यवस्था ठेके पर थाने और चौकियां। नरो में उत्तम जैसा नाम रख कर छदम नेता.. अपना और अपनो का हित देखते रहे.., मगर वो भूल गए कि सबसे बड़ी अदालत… ऊपर वाला चलाता हैं। यही नसीहत… तीन स्तंभ भूल गए.. मगर न्यायपालिका. आज भी अपना धर्म निभा रही है। इसका एक उदाहरण देखने को मिला हैं।
बिजलपुर इन्दौर निवासी युवक की शव संदिग्ध अवस्था में अपने घर से करीब 80 किलोमीटर दूर धार जिले के धामनोद थाने के अन्तर्गत मिलने के बाद हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश शासन के वकील को निर्देश देते हुए धामनोद पुलिस द्वारा युवक का शव संदिग्ध अवस्था में मिलने के बाद उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी मांगी हैं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता गौरव पांचाल ने बताया कि दिनांक 05.04.2022 को बिजलपुर इन्दौर निवासी युवक का शव अपने घर से दूर लगभग 80 किलोमीटर दूर शव धार जिले धामनोद खलघाट स्थित नर्मदा नदी के किनारे संदिग्ध अवस्था में मिला था इस मामले में धामनोद पुलिस द्वारा मर्ग कायम करने के बाद लापरवाहीपूर्वक एवं सुस्त रवैये से जांच की जा रही है धामनोद पुलिस द्वारा निष्पक्ष रूप से मंर्ग की जांच भी नहीं की गई इस हेतु मृतक की माताजी द्वारा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों जैसे एसपी धार आईजी ग्रामीण क्षेत्र इन्दौर आदि को कई शिकायतें भी की गई परन्तु पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भी युवक का शव की संदिग्ध अवस्था में मिलने के मामले में कोई उचित कार्यवाही नहीं की गई जिसके पश्चात मृतक की माताजी द्वारा हाईकोर्ट एडवोकेट गौरव पांचाल के माध्यम से माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका प्रस्तुत की गई उक्त याचिका में बताया गया कि युवक का शव संदिग्ध अवस्था में मिलने के बाद धामनोद पुलिस द्वारा लापरवाहीपूर्वक एवं सुस्त रवैये से जांच की जा रही हैं। मृतक को जिस गाड़ी मालिक द्वारा धामनोद भेजा गया था उसने रात्रि में अपनी कार दो अन्य व्यक्तियों के भेजकर वापस मंगवा ली परन्तु मृतक का पता लगाना जरूरी नहीं समझा ना ही पुलिस को उसके लापता होने की कोई गुमशुदगी दर्ज करवाई गई मृतक का शव अगले दिन नर्मदा नदी किनारे खलघाट के समीप मिला जो कि संदिग्ध अवस्था में था जिसको लेकर मृतक के परिजनों द्वारा कई सबूत एवं प्रमाण सहित कई शिकायतें धामनोद पुलिस एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को की गई परन्तु पुलिस द्वारा किसी प्रकार की कार्यवाही मृतक की मौत के मामले में नहीं की गई। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश शासन के वकील से इस मामले में उठाये गए कदमों के बारे में जानकारी मांगी गई हैं।
