पुल हादसा: मोरबी नगर पालिका ने कोर्ट में कबूला – पुल के उपयोग की अनुमति नही थी

गुजरात के मोरबी जिले में मच्छ नदी पर बने 150 साल पुराने पुल के उपयोग की इजाजत नही थी, इसके बाजवूद इसका उपयोग कराया जा रहा था। इसी के चलते बीते दिनों पुल के टूटने से 135 लोगों की मौत हो गई और कई आज भी अपंगता का शिकार है। बीते 2021 से लेकर 2022 तक पुल को खतरनाक घोषित किया जा चुका था, इसके बावजूद इस पर लोगों की आवाजाही कराई जाती रही।
हाईकोर्ट में मामला जाने के बाद बुधवार को मोरबी नगर पालिका ने हाईकोर्ट के सामने स्वीकार किया है कि जिस दिन पुल गिरा उस दिन भी पुल के उपयोग की अनुमति नहीं थी. दिसंबर 2021 से मार्च 2022 तक पुल खतरनाक स्थिति में होने की रिपोर्ट के बावजूद जनता द्वारा पुल का उपयोग किया गया था. हाईकोर्ट ने मोरबी नगर पालिका के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की. उसने पूछा कि कैसे बिना जनरल बोर्ड की मंजूरी के ओरेवा ग्रुप को काम दे दिया गया. एमओयू या समझौते में पुल के इस्तेमाल की अनुमति कैसे दी गई. अदालत ने मुख्य अधिकारी को 24 नवंबर को पेश होने का आदेश दिया है.
गौरतलब है कि ब्रिटिश काल का पुल निजी कंपनी द्वारा मरम्मत के बाद खोले जाने के 5 दिन बाद यानी 30 अक्टूबर को ढह गया था. हादसे में महिलाओं, बच्चों सहित 135 लोगों की जान चली गई थी. इसके बाद हाईकोर्ट ने खुद मामले का संज्ञान लेते हुए पुल के रखरखाव के लिए ठेका देने के तरीके पर सवाल उठाए थे. साथ ही सरकार को फटकारा था
