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जनसेवा-देशभक्ति: दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर है शहर की सुपर 100 गल्र्स

पुलिस विभाग ने 12-12 घंटे सेवा ली और वेतन के नाम पर दिखाया ठेगा

रतलाम। शहर में रहने वाली कमजोर तबके की लड़कियों में जनसेवा और देशभक्ति का भाव जगा कर उन्हे पुलिस सेवा से जोडऩे की एक बेहतर पहले विगत वर्षो रतलाम में हुई थी। मगर आज इसी पहल का परिणाम ये है कि रतलाम शहर की सुपर 100 गल्र्स दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर है। इन बालिकाओं ने आज महिला एवं बाल विकास अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों को ज्ञापन देकर जिम्मेदारों से रोजगार की व्यवस्था की मांग की है।
पुलिस का बेहतर तरीके से प्रशिक्षण लेने के बाद रोजगार के लिए भटक रही शहर की सुपर 100 गल्र्स का कहना है कि तत्कालीन कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान और एसपी गौरव तिवारी के कार्यकाल में महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से सुपर 100 गल्र्स योजना शुरु की गई थी। जिसमें शहर की स्लम बस्तियों में रहने वाली लड़कियों का चयन किया जाकर उन्हे बकायदा पुलिस ट्रेनिंग पुलिस लाईन में दी गई थी।
इन लड़कियों की टे्रेनिग पूरी होने के बाद जिला व पुलिस प्रशासन के जिम्मेदारों ने इन्हे आश्वासन दिया था कि आने वाले समय में पुलिस या अन्य सेवा से जुड़ी भर्ती में इन्हे प्राथमिकता दी जाएगी। सुपर 100 गल्र्स ने इन जिम्मेदारों की बातों पर यकीन किया।
इधर इनकी टे्रनिंग पूरी होने के बाद ही कोविड-19 की पहली और दूसरी लहर शुरु हो गई तो पुलिस प्रशासन ने इन सभी प्रशिक्षण प्राप्त लड़कियों को जनता की सुरक्षा मेें लगा दिया, मगर वैतन के नाम पर धेला भी नही दिया। इसी तरह इन्हे आए दिन कभी होली तो कभी रंगपंचमी तो कभी क्या तो कभी क्या जैसे आयोजनों में ड्यूटी लगाई जाने लगी। कभी यातायात सुधार के लिए चौराहे चौराहे पर खड़ा कर दिया तो कभी किसी मंत्री संत्री की अगवानी में ड्यूटी लगा दी। मगर इन सभी कामों के बदले इन्हे एक रुपए की सहायता प्रदान नही की गई।
आज हालात ये है कि लड़किया प्रशिक्षित होने के बाद दर दर की ठोकरे खाकर रोजगार प्राप्ति का इंतजार कर रही है। इधर उधर भटकने के बाद आज ये लड़कियां महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यालय पर दस्तक देने पहुची मगर वहां भी इन्हे कोई ठोस आश्वासन नही मिल पाया है। ऐसे में तय है कि आने वाले समय में इस तरह की योजनाओं और कार्यक्रमों पर कोई बेरोजगार या जरुरतमंद विश्वास नही करेगा।

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