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हनुमान तालाब में हजारों जहरीली मछलियों का शिकार

रतलाम
शहर के पटरी पार स्थित प्राचीन सज्जन मिल (हनुमान ताल) में पिछले सालों से बड़े पैमाने पर हर दिन हजारों मछलियों का शिकार कर उन्हे खुले बाजार में बेचा जा रहा है। जानकारों के मुताबिक इस तालाब का पानी प्राणी मात्र के लिए खतरनाक है ऐसे में मछलियां भी जहरीली होकर मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
बताया जाता है कि लगभग पिछले पांच सालों से हनुमान ताल को कुछ रसूखदारों ने मछली उत्पादन का तालाब बना रखा है। कुछ रसूखदारों ने पहले छोटे पैमाने पर यहां मछली पालन केन्द्र खौला था और बड़े पैमाने में मछलियों के शिकार का उद्योग चला रहे है। मछली कारोबारियों के तालाब के माध्यम से किए जा रहे मछलियों के धंधे से ना तो जिला प्रशासन को कोई अतरिक्त आय हो रही है और ना ही सिचाई विभाग, नगर निगम सहित तालाब से जुड़े किसी अन्य विभाग के खजाने में राजस्व पहुच रहा है।
मछलियों के शिकारी हर दिन लगभग 150 बीघा में फैले इस तालाब में चारों तरफ जाल बिछाते है और नाव आदि के माध्यम से मछलियों को पकडक़र खुले बाजार में इसका व्यापार कर रहे है या शहर के बाहर भी इन्हे बेच रहे है।
कुछ सालों पहले मछली कारोबारियों ने तालाब को ठेके पर देने की बात कही थी, मगर मत्स्य सहित अन्य विभागों ने तालाब के दूषित पानी में मछलियों के पालन की मनाही की थी। मगर इसके बावजूद रसूखदार तालाब का उपयोग मछली पालन के लिए करते आ रहे है।
बताया जाता है कि तालाब के आसपास संचालित होने वाले स्कूल, कालेज, मांगलिक भवन, मैरिज गार्डन सहित दो दर्जन से ज्यादा कालोनियों को मल मूत्र सहित अन्य गंदगी से भरा पानी तालाब में ही आ रहा है। तालाब तक आने वाले पानी को ट्रीटेट करने के लिए नगर निगम ने योजना बनाई भी है, मगर कुछ मछली माफिया अपने मछली व्यापार प्रेम के लिए योजना में अडंगा लगाते आ रहे है।
पिछले दिनो नगर निगम की राजस्व व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तालाब से तीन नाव और कई क्विंटल जाल बरामद किया है। मगर जानकारों का कहना है कि अवैध रुप से मछलियों का शिकार करने वालों ने यहां पुन: जाल फैलाना शुरु किया है। इधर निगम प्रशासन इन मछली माफियाओं पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।

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