कोर्ट ने कहां-कैसी कलयुगी मां हो, पिता और बेटी के रिश्ते को कंलकित कर दिया
अपनी ही बेटी के साथ दुष्कर्म के आरोपित पिता को 20 माह बाद रिहा किया गया

औरत घर को बसा भी सकती है और उजाड़ भी सकती है। ऐसा ही एक मामला राजस्थान से सामने आया है जिसमें एक महिला ने अपने पति का घर अपने नाम कराने के लिए अपने भाई के साथ साजिश रचते हुए अपनी ही बेटी के साथ दुष्कर्म के झूठे आरोप में जेल भिजवा दिया। लगभग सवा साल तक जेल में बंद होकर भारी बैइज्जती का शिकार हुए इस अभागे पिता को कोर्ट का सहारा मिला और इसे रिहा किया गया है। इस प्रकरण में फैसला सुनाते हुए विशिष्ट पोक्सो कोर्ट के न्यायाधीश रतनलाल मूंड ने लडक़ी की मां से कहा- कैसी कलयुगी मां हो तुम। एक मां अपनी बेटी-बेटे और परिवार का कभी बुरा नहीं सोच सकती, लेकिन तुमने तो पिता और बेटी के पवित्र रिश्ते पर ही कलंक लगाने जैसे घिनौना काम किया है।
यह सच्ची घटना है नागौर के मारोठ इलाके के एक गांव में रहने वाले एक गरीब इंसान की, जो मजदूरी करके अपना पेट पाल रहा था। 26 दिसंबर 2020 को उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई, जब उसकी पत्नी ने उस पर अपनी ही 12 साल की बेटी से रेप का मुकदमा दर्ज कराया।
पुलिस ने उसे नाबालिंग बेटी के साथ हुए दुष्कर्म के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया। इसे जेल भेज दिया गया। बेटी के साथ दुष्कर्म के आरोप लगे तो सगे संबधियों सहित मिलने जुलने वालों ने भी इससे नाता तोड़ लिया। जेल में अन्य कैदियों ने भी समय-समय पर इसके साथ बदसलुकी की।
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मेरे पास वकील तक के लिए पैसे नहीं थे, कोई मदद के लिए भी आगे नहीं आया, फिर कोर्ट से ही वकील मिला। एक दिन वे मिलने आए और मुझसे बात की, तब उन्हें मैंने सारी सच्चाई बताई। फिर उन्होंने मेरे गांव के कुछ लोगों को मेरी बेगुनाही के बारे में बताया, तब जाकर गांव से मेरा एक भाई मिलने आया। आज भले ही सच्चाई सामने आ गई, लेकिन मैं किस-किस को जाकर बताऊं कि मैं बेगुनाह था।
इसी दौरान मेडिकल रिपोर्ट सहित अन्य जांचों की रिपोर्ट सामने आई जिसमें यह साबित नही हो सका की, बच्ची के साथ में किसी तरह की हरकत या बदसलूकी हुई थी। इस अभागे पिता को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से सहायता मिली और यहां से तय वकील ने पूरे प्रकरण का अध्ययन कर ये पाया कि पूरे मामले में आरोपित की पत्नी ही दोषी है और इसने अपने पति को झूठे प्रकरण में उलझाया है। पत्नी से जब कड़ाई से पूछताछ की तो इसने में रची गई साजिश का खुलासा किया। इसके बाद 20 माह की अनचाही सजा भुगत चुके व्यक्ति को रिहा किया गया है।
