कलेक्ट्रेट में गंदगी: अफसर से लेकर कर्मचारी तक नप गए
अफसरों पर 500-500 व कर्मचारियों पर 300 से 100 रुपए तक शास्ति आरोपित की गई

रतलाम। हर कोई चाहता है, मेरा घर साफ रहे,बाकि जगह जाए हर तरफ भाड़ में जाए, और यही कारण है कि तमाम प्रयासों के बावजूद शासकीय-अशासकीय कार्यालय, अन्य संस्थान और पूरा शहर गंदगी की चपेट में है। कही तो जनता की गंदी सोच और कही शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी निभाने वालों के मुंह में लगा लालच खून शामिल है। इसी माह के पहले सप्ताह में नए कलेक्टर कार्यालय भवन के कुछ हिस्सों में गंदगी की बात सामने आई तो आला अधिकारी ने इन स्थानों को साफ करा दिया, मगर एक सबक उन तमाम अधिकारी और कर्मचारियों को भी दिया है, लगातार इस तरह की गंदगी को अनदेखा कर गंदे वातावरण में काम करने के आदि हो चुके थे।
भरोसेंमंद सूत्रों की माने तो पिछले दिनों नए कलेक्टर कार्यालय के पहले और दूसरे तल परिसर पर लेटबाँथ के निकट गंदगी पाए जाने कलेक्टर महो. द्वारा नाराजगी जाहिर की गई थी। उन्होने इस मामले में सख्त निर्णय लेते हुए एक ऐसा निर्णय दिया है, जो एक मिसाल भी माना जा सकता है।
कलेक्टर ने जिन तलों पर गंदगी पाई जाने की तस्वीरे सामने आई थी, उन तलों के कार्यालयों में बैठकर अपने निजी और सरकारी काम निपटाने वाले सभी अधिकारियों पर 500-500 रुपए जुर्माना वसूल करने के निर्देश दिए है। इसी तरह इन तलों पर काम करने वाले तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों से 300-300 रुपए और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से 100-100 रुपए की शास्ति आरोपित किए जाने के आदेश दिए है।
गौरतलब है कि इस कार्यालय के दूसरे और तीसरे तल पर मलाईदार विभाग है मगर यहां सिर्फ मलाई की आस लिए आए अधिकारी-कर्मचारी कार्यालय के भीतर और बाहर की स्वच्छता पर ध्यान नही देते है। हालात ये है कि नए भवन के कई हिस्सों,दिवारों, कोनो आदि स्थानों पर पान, गुटके की पीक तो कही अन्य तरह की गंदगी कलेक्टर कार्यालय की स्वच्छता की पोल खोल रही है। हालात ये भी है कि जहां पीने की पानी की व्यवस्था की गई है उन जगहों पर सफेद के क्वाटर डिस्पोजल, चाखन के खाली पैकेट के कई चित्र कई मर्तबा जाहिर हो चुके है। मगर कभी किसी तरह की सख्त कार्रवाई नही होने से ढर्रा बिगड़ा हुआ ही था।
बताया जाता है कि कई अफसर व कर्मचारी भी पान, बीड़ी, सिगरेट, गुटखे और मसली हुई तम्बाकू का शौक रखते है, ऐसे में ये थूके कहां ? और ये वही थूक देते है जहां इनका मन करता है। पिछले दिनों मामला उजागर होने के बाद सफाई की नई व्यवस्था की गई है। इस मामले में नगर निगम का भी सहयोग लिए जाने के बात सामने आई है, अब नगर निगम वाले शहर को पांच बार से नम्बर -1 बनाने के बाद ? कलेक्टर कार्यालय को प्रदेश व देश का सबसे स्वच्छ और सुंदर बनाने के प्रयास करेगे। भले ही नगर निगम कार्यालय भवन के कोनो में ही गंदगी का आलम हो।
बहरहाल अपने अधिकारी-कर्मचारियों को स्वच्छता के प्रति जाग्रत के लिए बड़े साहब का उक्त कदम जिम्मेदारों का जमीर जगाता है या सफाई के नाम पर भी ईमान डगमगाता है, ये आने वाले समय में पता चलेगा। फिलहाल व्यवस्था काफी हद तक सुधरी नजर आ रही है, आगे भी ऐसा है चलता रहे, ताकि कलेक्टर कार्यालय के साथ ही नगर भी स्वच्छता की दौड़ में नम्बर-1 बन सके।
