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सज्जनमिल की चाल और बाहर लगी 100 दुकाने हटाई जाएगी

रतलाम
किसी समय शहर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ और प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रुप में पहचान बनाने वाला सज्जनमिल लगभग 30 सालों से बंद है। इस मिल से जुड़ी कुछ जमीने पूर्व कलेक्टर और एडीएम औने-पौने में दामों में बेच गए और जो जमीन बची है उसमें सज्जनमिल की चाल और बाहर लगभग 100 दुकानों की कतारे लगी है। नगर विधायक और केबिनेट मंत्री चेतन्य काश्यप की पहल और पुरजोर प्रयासों के चलते इन्दौर के हुकुमचंद मिल की तर्ज पर रतलाम के सज्जनमिल का भी प्रदेश सरकार ने निराकरण करते हुए इसकी जमीन पर व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना तैयार की है। जिसके चलते जल्द ही लगभग 2000 हजार से ज्यादा पूर्व श्रमिकों को मुआवजे आदि का भुगतान कर दिया जाएगा। इसके साथ ही बैंकों और नगर निगम की देनदारिया भी चुका दी जाएगी।
साल 1931 में विस्तारित स्वरूप के साथ प्रारंभ हुई बॉम्बे यूनाइटेड मिल्स (सज्जनमिल) की मशीनों ने वर्ष 1996 से काम करना बंद कर दिया था। इसके बाद से यहां काम करने वाले मजदूरों के बकाया भुगतान को लेकर भी लगातार प्रयास किया जा रहा था। वित्तीय संकट के चलते यह जब बंद हो गई थी तब लगभग 2900 मजदूर प्रभावित हुए थे। जानकारों के अनुसार मिल के बंद होने का सिलसिला वर्ष 1986 से ही शुरु हो चुका था। बाद में पूर्व सांसद दिलीप सिंह भूरिया के प्रयासों से सरकार की अंडरटेकिंग में मिल शुरु हुई, मगर समय पर वेतन नही मिलने के कारण श्रमिकों ने ऐसी हड़ताल शुरु की थी कि 1996 में मिल फिर बंद हो गई। जिस समय मिल बंद होने की कगार पर थी, उस समय लगभग 3500 श्रमिकों का वेतन बकाया था।

इस मिल के बंद होने के बाद जहां एक और श्रमिकों के भुगतान अटके हुए थे। वही मुंबई एसबीआई की भी देनदारी करोड़ों में थी। कुछ साल पहले लिक्विडेटर व्योमेश ने टीम के साथ यहां पहुंचकर बंद पड़ी मिल, उसकी जमीन और ईमारतोंं का निरीक्षण किया। उसके बाद बाकी बची लगभग 53 बीघा से ज्यादा जमीन को अधिकार में लेने के साथ ही ऑफिस सील कर दिया। पूर्व में इस मिल से जुड़ी जमीन लगभग 300 बीघा थी,मगर इस मिल से जुड़ी समितियों और अफसरों ने इसका ज्यादातर हिस्सा बेच दिया है। आज के 80 फीट रोड़ (रत्नपुरी) की जमीन व आसपास का हिस्सा भी इसी मिल की जमीन थी।
इधर न्यायालय के निर्देश और सरकार के प्रयासों के चलते सज्जनमिल श्रमिकों की बकाया राशि का फैसला जल्द ही होने वाला है। पिछले दिनों कुछ बैंककर्मियों ने इस मिल से जुड़ी भूमि का आंकलन किया है। साथ ही देनदारियों की भी विस्तृत जानकारी ली है। मिल पर बिजली कंपनी का लगभग 17 करोड़ रुपए बकाया है। इसी तरह नगर निगम की संपत्तिकर राशि 1 करोड़ 17 लाख रुपए बकाया है। एसबीआई सहित अन्य की भी देनदारिया करोड़ों रुपए में होना बताई जाती है।
इस सज्जनमिल की जमीन के निराकरण और श्रमिकों के भुगतान सहित अन्य देनदारियों के चुकता होने के बाद जमीन के नए मालिक सज्जनमिल की चाल में वर्षो से बसे लगभग 150 से ज्यादा परिवारों को बैदखल करेगी। साथ ही सज्जनमिल गेट के बाहर लगी दुकानों को भी हटाएगी।

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