संबधों के चक्रव्यूह में उलझी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता देवी को मिली दर्दनाक मौत

रतलाम
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता,कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता।
जिले के शिवगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम नयाखेड़ी निवासी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता देवीबाई की हत्या का खुलाशा पुलिस ने बुधवार शाम कर दिया है। थाना शिवगढ़ पुलिस की कुछ खामियों से ये वो अंधा कत्ल था जिसे कई दिनों और महिनों तक सुलझाने में पसीने छूट सकते थे, मगर पुलिस के आला अफसरों ने इस गुत्थी को मनोवैज्ञानिक तरीके से सुलझा कर लगभग एक अजूबे जैसे काम किया है।
जानकारों के अनुसार देवीबाई के पति की मौत लगभग 13 साल पहले हो चुकी थी उस दौरान इनके दोनो बच्चे छोटे थे। अकेली विधवा महिला पर दो बच्चों के पालन पोषण का जिम्मा था। ऐसे में इसके देवर ने हाथ बढ़ाया और मृतिका इसके साथ लगभग डेढ़ साल संबधों में रही थी। इस दौरान देवर भूरालाल जब मृतिका पर ज्यादा ध्यान नही दे पाया तो मृतिका के जीवन में तीसरे पुरुष बसंतीलाल की इन्ट्री होती है। इसकी जानकारी जब देवर को लगती है तो वह बंसतीलाल से सम्पर्क कर पूछता है कि क्या तू मृतिका का ठीक तरह से पालन पोषण कर पाएगा? इस पर आरोपी बंसती हामी भरता है। इसके बाद देवर भूरालाल मृतिका देवीबाई से भी पूछता है कि क्या तुम बंसतीलाल के साथ रहने को तैयार हो तो इस पर मृतिका का कुछ दिन बाद सोच विचार करने के बाद बोलने का कहती है। मगर भूरालाल को आश्चर्य जब होता है कि उसी दिन शाम को मृतिका बंसतीलाल के साथ रहने की हामी भरने की सूचना मोबाईल पर देती है।
बताया जाता है कि बंसतीलाल पूर्व से ही विवाहित था और इसके बच्चे भी थे, मगर पत्नी छोडक़र चली गई थी। मृतिका लगभग सात आठ साल से बंसती के साथ रह रही थी। इस दौरान बंसती किसी अन्य महिला को भी नातरे ले आया था जो गर्भवती बताई जाती है। मृतिका और बंसती के बीच बने संबधों के बीच बंसती ने मृतिका को रहने के लिए मकान सहित अन्य सुविधाए दी थी। मृतिका के दो बच्चे भी अब बढ़े होकर अलग अलग स्थानों पर पढ़ाई कर रहे है।
इनके बीच सब कुछ ठीक चल रहा था, मगर बंसती और मृतिका के बीच संपत्ति को लेकर जो करार हुआ था, उसमें बंसतीलाल टालमटोल कर रहा था। जिसके कारण जुलाई माह में कुछ विवाद भी हुआ और मामला थाने तक भी पहुचा था। इसी मसले के बीच किसी तीसरे की इन्ट्री की खबर उड़ते हुए बंसतीलाल के पास पहुची तो उसने समझा बुझा कर मामला शांत कर दिया था। इधर मृतिका संपत्ति को लेकर तकादा करती रही तो बंसतीलाल का बाप बद्दा पिता दल्ला डामर भी इस विवाद में शामिल हो गया। बाप चाहता था कि मृतिका इसके बेटे बंसतीलाल के साथ ही रहे, मगर परिस्थितियां कुछ ऐसी बनती जा रही थी कि बंसती और मृतिका के बीच अलगाँव हो सकता है।
बताया जाता है कि बंसतीलाल का बाप बद्दा डामर अपने साथ हमेशा तेजधार वाली कुल्हाड़ी रखता था। इससे गांव के लोग डरते भी थे। इसलिए पुलिस का शक सबसे पहले इसी पर गया था। पुलिस ने अपना मुखबिर तंत्र फैलाया तो कई किस्से सामने आए और इसी के आधार पर बंसतीलाल और इसके बाप बद्दा डामर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। खुद एसपी अमित कुमार अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर पहुचे और अंधे कत्ल को हर हाल में सुलझाने के टीम का गठन किया। पुलिस टीम ने भी दिन रात एक करते हुए आरोपितों से तरह तरह से पूछताछ करने के साथ ही मनो विज्ञान का सहारा लिया और इसी के चलते आरोपितों ने अपना जुर्म कबूला है। आरोपितों के अनुसार मृतिका अपने घर के बाहर खाट (पंलग) लगाकर सोती थी, और इसी का फायदा उठाकर इसे वारदात वाली रात कुल्हाड़ी से हमला कर मार दिया गया। इस तरह संबधों के चक्रव्यूह में फसी महिला की असमय मौत हो गई। बताया गया है कि
अब मृतिका के बच्चे फिलहाल बैसहारा है और बताया जा रहा है कि देवर के निगरानी में रह सकते है।
