छट पूजा: बेटियों की सलामती के लिए पुरुष रखते है छठ का उपवास
पिपराडीह गांव में पैदा होते ही मर जाती थी बेटियां, इनकी सलामती के लिए रखते आ रहे व्रत

लोक आस्था के महापर्व छठ की शुरुवात हो चुकी है, और सामान्य जानकारी है कि इस पर्व का उपवास ज्यादातर महिलावर्ग ही रखती आई है। लेकिन बिहार के बांका के कटोरिया प्रखंड स्थित पिपराडीह गांव में छठ महापर्व का व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत महिलाओं की बजाय पुरुष रखते हुए इस पर्व को विधि विधान से मनाते है।
जानकारों के मुताबिक इस गांव में बेटियां पैदा होते ही मर जाती थी, गांव का हर पिता अपनी बेटियों के बचाने के लिए बड़ा से बड़ा इलाज कराता, नीम हकीमों की सलाह लेता था, मगर बेटियों की मौत रुकने का नाम ही नही ले रही थी। ऐसे में कुछ ग्रामीणों ने एक बाबा की सलाह ली तो बाबा ने बताया कि अगर गांव के पुरुष छट का निर्जला व्रत रखना शुरु कर देगे तो बेटियां सलामत रह सकती थी, तभी से पुरुष इस व्रत को रखते आ रहे है। इसी तरह समस्तीपुर के रघुनाथपुर गांव में भी पुरुष ही छठ का व्रत रखते आ रहे है।

