इंडिया वाटर वीक: दूषित पानी से हर साल 3 करोड़ बच्चे होते है बीमार
इंडिया वाटर वीक के बीच आई चौकाने वाली रिपोर्ट, दूषित पानी वितरण का प्रमुख माध्यम है नल

भारत में करीब 3.77 करोड़ लोग हर साल प्रदूषित पानी के कारण होने वाली बीमारियों की चपेट में आते हैं. करीब 15 लाख बच्चे ही हर साल डायरिया की चपेट में आने से मर जाते हैं. वैश्विक संस्था वॉटर डॉट ओआरजी ने दावा किया था कि 6 फीसदी भारतीय जनसंख्या को साफ पानी उपलब्ध नहीं होता है। वही मात्र 2 प्रतिशत लोगों को नलो के माध्यम से पीने लायक पानी का वितरण हो पा रहा है।
बीते दिवस देश में साफ पानी की पहुंच को लेकर कम्युनिटी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोकल सर्कल्स ने सर्वे रिपोर्ट जारी की ह। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश में सिर्फ 2 फीसदी ही लोगों तक ही नलों के जरिये पर पीने का साफ पानी पहुंच रहा है। लगभग 65 फीसदी लोग घरों में पानी को साफ करने के लिए फिल्टर तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं.
सर्वे में 34 फीसदी लोगों ने कहा है कि वे इसके लिए वॉटर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करते हैं. 31 फीसदी लोग आरओ सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं. एक फीसदी लोग क्लोरीन से पानी साफ करते हैं. 14 फीसदी लोगों ने पानी को उबालकर इस्तेमाल करने का तरीका बताया है. वहीं 5 फीसदी लोगों ने कहा है कि वे इसके लिए मिट्टी के घड़ों को अपनाते हैं. इन सबके अलावा 7 फीसदी लोग ऐसे हैं, जो इनमें से किसी भी तकनीक का इस्तेमाल नहीं करते और घरों पर पानी की बोतल मंगाते हैं.
