जिला अस्पताल का सीसीयू वेन्टीलेटर पर,रोगी परेशान
बड़ों और बच्चों के अस्पतालों की छतों से भी टपक रहा है बरसात का पानी

रतलाम।
जब नवनिर्मित करोड़ों रुपए की लागत वाले डेम और पूल बह जाते है तो बरसात के दिनों में कुछ करोड़ों रुपए की लागत वाले सरकारी भवनों की बिसात ही क्या है। इन दिनों बीते सोमवार से रुक रुक हो रही बरसात ने सरकारी भवनों के निर्माण और उनकी गुणवत्ता की पौल खौली है। इसी हल्की-फुल्की बरसात ने जिला अस्पताल में स्थित सीसीयू (कार्डिक केयर यूनिट) सहित पूरे अस्पताल और यहां तक करोड़ों की लागत से कुछ सालों पहले बने एमसीएच की भी बदहाली को उजागर किया है।
जिला अस्पताल में आईसीयू के समीप ही बीते वर्षो सीसीयू (कार्डिक केयर यूनिट) की शुरुवात की गई है, जिसमें आधा दर्जन से अधिक बिस्तर, प्रशिक्षित स्टाँफ व
तमाम संसाधन उपलब्ध है। बीते सोमवार की रात से शुुरु हुई बरसात के बाद यहां की छत टपकने लगी तो अस्पताल प्रशासन ने यहां भर्ती रोगियों को अन्यंत्र भर्ती कर पानी टपकने वाले स्थानों बाल्टियां लगा दी। जब रोगियों को दबाव बढऩे लगा और सीसीयू के बिस्तरों की बात आई तो बुधवार को यहां ताला लगा दिया गया।
इधर जिला अस्पताल की हर प्रशासनिक सेवा का भवन और वार्डो की छतों से पानी टपक रहा है। उधर पाँवर रोड़ स्थित एमसीएच और बाल चिकित्सालय भवन की छतों ने भी जवाब देना शुरु कर दिया है।
बीते दिनों बाल चिकित्सालय में भर्ती कुंजड़ों का वास निवासी एक व्यक्ति ने छतों से लगातार पानी गिरनें की शिकायत दर्ज कराई जिस पर अस्पताल प्रबंधन ने कोई ध्यान नही दिया। इसी व्यक्ति ने जब इस मामले की शिकायत सीएम हेल्प लाईन पर की तो इस शिकायत के निराकरण की गरज से बाल चिकित्सालय की छत पर वाँटर प्रूफिंग कराने की मांग एक पत्र के माध्यम से नगर निगम आयुक्त से की गई है। मगर आज तक ना तो वो शिकायत कट पाई और ना ही बाल चिकित्सालय की छत की मरम्मत हो पाई है।
यही हाल एमसीएच के भी है और यहां की टपकते छतों के बीच जच्चा-बच्चा भर्ती होने और अपना इलाज कराने के मजबूर है।
जानकारों की माने तो शासकीय चिकित्सा संस्थाओं और अन्य सरकारी भवनों में बरसात के पूर्व मरम्मत का कार्य नही कराया जाता है। ऐन समय पर बरसात के दौरान मरम्मत का मामूली कार्य होता है, जो कुछ दिन टिकने के बाद बाद फिर परेशानी का सबब बन जाता है।
