Uncategorized

हाईकोर्ट के निर्देश पर ठग हेमन्त बागड़ी पर एक और प्रकरण दर्ज

 

रतलाम
कोचिंग सेंटर संचालक, भाजपा अ.जा.मोर्चा का जिला मीडिया प्रभारी, निलंबित पटवारी, निजी बैंक कर्मचारी सहित करीब आधा दर्जन पद प्रतिष्ठा की आड़ में कई लोगों के दस्तावेज हासिल कर फर्जी तरीके से विभिन्न बैंकों से लोन निकाल चुके हेमन्त बागड़ी को पुलिस ने हिरासत में लेकर जेल भेज रखा है। पुलिस से बचने के लिए हेमन्त बागड़ी ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत पाने का फर्जी तरीका भी अपनाया था, जिसे बाद में हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट में फर्जी दस्तावेज और झूठे शिकायतकर्ता प्रस्तुत करने के मामले में पुलिस ने कोर्ट के निर्देश पर आज एक और प्रकरण धारा 420.467,468.471 आईपीसी का दर्ज किया है।
किसी समय निजी फायसेंस कंपनी मेें चैनल मेनेजर रह चुके हेंमत पिता महेन्द्र बागड़ी का शातिर दिमाग तेजी से चलता है। लोगों को लोन दिलाने की साजिश रच ली और करीब आधा दर्जन लोगों के दस्तावेज एकत्र कर उनके नाम से लोन निकाल लिए थे।
शहर के 80 फीट रोड़ स्थित मकान में रहने वाले हेमन्त बागड़ी ने अपने खिलाफ पुलिस में प्रकरण दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी। इसके लिए हेमन्त ने शिकायतकर्ता महेन्द्र पिता फकीरचंद परमार और शालीनी सक्सेना के नाम से दो लोगों को भी कोर्ट में खड़ा किया था। कोर्ट में इन फर्जी शिकायतकर्ताओं ने बताया था कि हम हेमन्त बागड़ी के खिलाफ किसी प्रकार की नही शिकायत नही करना चाहते है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत के आदेश भी जारी कर दिए थे।
इधर इस मामले की जानकारी असल शिकायतकर्ता महेन्द्र परमार को मिली तो उन्होने हाईकोर्ट को वास्तविकता से अवगत कराया और इसी आधार पर हेमन्त की अग्रिम जमानत 14 अक्टूबर 2024 को निरस्त कर दी थी।
प्रकरण दर्ज कर फर्जी लोगों की तलाश करे
हेमन्त बागड़ी के काले कारमानों और शातिराना तरकीबों से हैरान हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिए है कि हेमन्त ने कोर्ट में फर्जी शिकायतकर्ता, वकालतनामा और शपथ पत्र प्रस्तुत किए थे। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिए है कि हेमन्त बागड़ी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उन लोगों की भी तलाश की जाए तो कोर्ट में शिकायतकर्ता के रुप में आए हुए थे।
वकीलों और नोटरी ने दी सफाई
हेमन्त बागड़ी की अग्रिम जमानत में सहयोग करने वाले नोटरी व वकीलों को माफी दी है।
बताया जाता है कि हेमन्त की अग्रिम जमानत के लिए अधिवक्ता मुदित माहेश्वरी, कनिष्क गुप्ता और श्रेयांश जैन और नोटरी सुश्री सुनिता छाजेड़ को भी नोटिस जारी किया गया था। इन सभी ने कोर्ट में अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करते हुए हलफनामा प्रस्तुत किया था। हाईकोर्ट ने इस प्रकरण में पाया है कि आरोपी हेमन्त बागड़ी ने अपने अधिवक्ताओं और नोटरी के साथ भी छल किया है। हाईकोर्ट ने पाया है कि इस पूरे प्रकरण में नोटरी और अधिवक्ता इस अपराध में शामिल नही है। इनके खिलाफ अब किसी तरह की कार्रवाई नही की जाएगी।

3 साल के बच्चे से माँ छिनी
छल और फर्जी तरीकों से रुपए कमाने वाले हेमन्त बागड़ी ने हराम की इस कमाई का उपयोग अपनी विलासता के लिए किया था। आलोट में पटवारी की नौकरी करते हुए एक प्रकरण में ये निलंबित हुआ तो इसने फर्जी दस्तावेजों से लोन निकालने की चाल चली और ऐसे आधा दर्जन मामलों में ये सफल भी हुआ, मगर शिकायत के बाद पुलिस ने इसे घेरने की तैयारी कर ली थी। आलोट में जब पुलिस ने धरपकड़ के प्रयास किए तो हेमन्त ने अपना नया ठिकाना उज्जैन को बना लिया और वहां किराए का मकान लेकर विलासतापूर्ण जीवन व्यतीत करने लगा। उज्जैन के एक इलाके में रहते हुए हेमन्त ने महिलाओं के एक गिरोह से सम्पर्क करते हुए तीन साल के बच्चे की माँ होकर विवाहित महिला से संबध जोड़े और उसे पति और बच्चे से अलग कर दिया। कुछ समय बाद महिला अपने पति और दुधमुंहे बच्चे को छोडक़र हेमन्त के साथ ही रहने लगी। हेमन्त इस महिला को आए दिन उपहार,रुपए, जेवर आदि दिया करता था, ऐसे में महिला भी हेमन्त को छोडऩे को तैयार नही थी। इसी महिला से जुड़ी चेन को तलाश करते हुए पुलिस हेमन्त तक पहुची थी और इसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

 

Related Articles

Back to top button