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उम्र 11 साल, 4 साल तक रतलाम की बेटी दुष्कर्म का शिकार,अब आरोपित जीजा को मिली 6 मर्तबा आजीवन कारावास की सजा

रतलाम की बेटी को न्याय दिलाने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सुपरवाईजर, पूर्व के कलेक्टर और एसपी ने किए भरपूर प्रयास

 

(अनिल पांचाल)

रतलाम की बेटी को उसी के जीजा ने 11 साल से भी कम छोटी अपनी साली के साथ 4 साल तक दुष्कर्म किया था। इस बेटी को न्याय दिलाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाईजर, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, पूर्व के कलेक्टर व एसपी ने भरपूर प्रयास किए वही न्यायाधीश ने आरोपी को ऐसी सजा सुनाई जो मिसाल बन चुकी है।
रतलाम के एक इलाके में अपने माता-पिता और बड़ी बहन के साथ रहने वाली मासूम बच्ची पर बचपन से दुखों का पहाड़ टूटने लगा था। इसकी बड़ी बहन की शादी नागदा क्षेत्र में रहने वाले दिनेश उर्फ छोटू राठौर के साथ कर दी गई। बड़ी बहन की शादी के बाद मासूम बच्ची गुनगुन (काल्पिनिक नाम) अपने माता पिता के साथ रतलाम में ही रहती थी, मगर कुछ समय बाद इसके सिर से माता पिता का भी साया उठ गया। माता पिता की मौत के बाद इसके जीजा दिनेश ने रतलाम आकर इसका घर भी बिकवा दिया और गुनगुन को लेकर नागदा चला गया।
नागदा पहुचते ही दिनेश ने अपना असली रंग दिखाना शुरु कर दिया और वो अपनी पत्नी (गुनगुन की बड़ी बहन) की अनुपस्थिति में वर्ष 2015 से लेकर 2019 तक लगातार गुनगुन के साथ दुष्कर्म करता रहा।
गुनगुन की बड़ी बहन को इस मामले की जानकारी नवम्बर 2019 में मिली तो उसने अपने पति का विरोध किया। इस विरोध के चलते दिनेश ने अपनी पत्नी और मासूम साली के साथ मारपीट शुरु कर दी।
बड़ी बहन को अपने पति की यह हरकत सही नही लगी और उसने पति को सबक सीखाने के लिए रतलाम निवासी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बरखा खांड़ला से दूरभाष पर सम्पर्क किया। श्रीमती बरखा ने इस पूरे मामले की जानकारी तुरंत सेक्टर सुपरवाईजर श्रीमती एहतेशाम अंसारी को दी। श्रीमती अंसारी ने तुरंत अपने विभागीय अधिकारी के माध्यम से पूर्व कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान और पूर्व एसपी गौरव तिवारी से सम्पर्क कर उन्हे मामले से अवगत कराया। जिला और पुलिस प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए दिनदयाल नगर थाने के माध्यम से कार्रवाई शुरु की गई और मामला बिरलाग्राम नागदा जिला उज्जैन की और भेजा गया। बिरलाग्राम पुलिस ने प्रकरण में पुरी शिद्दत से कार्रवाई करते हुए आरोपित जीजा दिनेश राठौर निवासी पिलौदा बागला थाना बिरलाग्राम नागदा के खिलाफ धारा 376 ए.बी. 376 (2) (एन) 376 (2)(एफ) 506 भाग-1 323 भादस तथा धारा 5 (एल)6,5 एन 6व 5 एम-6 लैङ्क्षगक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आरोपित दिनेश को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले के दौरान आधा दर्जन से अधिक लोगों की गवाही कोर्ट में प्रस्तुत की गई।
बचाव पक्ष बोला तलाक चाहती थी बड़ी बहन
आरोपी दिनेश अपने परिवार के पालन पोषण के लिए किसी तरह का काम धंधा नही करता था और अपने परिवार पर ही आश्रित था। इसके अधिवक्ता ने बचाव का पक्ष रखते हुए कोर्ट में बताया कि पीडि़ता की बड़ी बहन अपने पति दिनेश से तलाक चाहती थी, और इसके लिए आए दिन इनके बीच विवाद भी होते थे, ऐसे में अपनी छोटी बहन का सहारा लेकर इसने असत्य रिपोर्ट दर्ज कराई है।
इस मामले में विशेष लोक अभियोजक श्री रेवतीसिंह ठाकुर ने मजबूती से पीडि़ता का पक्ष रखते हुए दिनेश राठौर को कठोरतम दण्ड देने की प्रार्थना माननीय न्यायालय से की थी।
छह धाराओं में दिया गया आजीवन कारावास
सभी पक्षों को सुनने और तमाम सबूतों के आधार पर विशेष न्यायाधीश, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 नागदा (जिला उज्जैन) श्रीमती वन्दना राज पाण्डेय से निर्णय देते हुए अभियुक्त दिनेश राठौर को छह धाराओं में आजीवन कारावास की सजा और दो धाराओं में 1-1 वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अभियुक्त को दी गई सभी सजा साथ-साथ चलेगी। इस प्रकरण में अभियुक्त 6 दिसम्बर 2019 से 9 सितम्बर 2022 तक निरन्तर कुल 1008 दिन से न्यायायिक अभिरक्षा में रहा है।
अब मिलेगा प्रतिकर योजना का लाभ
न्यायालय ने अपने निर्णय मेें उल्लेख किया है कि अभियुक्त की आर्थिक स्थिति ऐसी नही है कि वह अभियोक्त्री को पर्याप्त प्रतिकर अदा कर सके। उक्त स्थिति में 31 मार्च 2015 से प्रभावशील म.प्र. अपराध पीडि़त प्रतिकर योजना के तहत पीडि़ता को हानि या क्षति के लिए प्रतिकर योजना का लाभ देने की सिफारिश की जाती है। न्यायालय के उक्त निर्णय की एक प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उज्जैन की और भी प्रेषित की जा रही है।

 

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