महालक्ष्मी मंदिर विवाद: माँ सरस्वती की वीणा जान बूझकर तोड़ी गई

रतलाम। शहर के माणकचौक स्थित बहुचर्चित महालक्ष्मी मंदिर में पुजारी को हटाए जाने का विवाद थमने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है। इसी मंदिर से निकाले गए पूर्व पुजारी ने प्रशासन और बाहरी लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए यह भी बताया है कि मंदिर में लगी माता सरस्वती की वीणा को शरारती तत्वों ने जानबूझकर तोड़ा था। पूर्व पुजारी के अनुसार इस मामले की न्यायिक जांच कराई जाना थी जो नही कराई गई है। पूर्व पुजारी ने एक लम्बी चौड़ी शिकायत के साथ ही पेन ड्राईव और तमाम फोटो भी प्रशासन को दिए है।
पूर्व पुजारी संजय पुजारी ने कलेक्टर को शिकायत दर्ज कराते हुए इसे मंदिर के पुजारी पद से हटाए जाने के आदेश को अवैध बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग की है।
पुजारी के अनुसार इनके बाप-दादा और माता इस मंदिर में पुजारी का काम करते आ रहे थे। इसी बीच गृह क्लेश के कारण इसके भाई राजेश ने आपत्ति भी दर्ज कराई थी। इसे हटाए जाने को लेकर संजय ने आरोप लगाया है कि कुछ असामाजिक तत्व और देव स्थानों से अवैध लाभ प्राप्त करते आ रहे लोगों ने षडय़ंत्र रच कर इसे हटाया है।
संजय के अनुसार इसके खिलाफ हुई शिकायतों के बाद प्रशासन ने कारण बताओं सूचना पत्र दिया था, मगर ना तो मेरी सुनवाई की गई और ना ही मेरे द्वारा प्रस्तुत प्रमाण की विधिवत जांच की गई और तहसीलदार ने एक अवैध आदेश निकाल कर मुझे पुजारी पद से हटा दिया है।
पुजारी ने फोटग्राफ और पेनड्राईव के माध्यम से सीसीटीवी फुटेज देते हुए शिकायत में उल्लेख किया है कि नीरज नामक व्यक्ति और इसके सहयोगियों ने सरस्वती माता की प्रतिमा पर लगी वीणा को अपने हाथों से तोड़ा है। संजय ने कुलदीप त्रिवेदी, घनश्याम व्यास, सत्यनारायण व्यास व अन्य पर इसे हटाने के लिए षडय़ंत्र करने का आरोप लगाते हुए बताया है कि मंदिर पर कब्जा करने के लिए अवैध समिति भी स्थापित की गई है, जबकि यह मंदिर शासकीय होकर इसका नियत्रंण कोर्ट आँफ वाडर्स के तहत है। संजय के मुताबिक इसे मंदिर के पुजारी पद से हटाए जाने के लिए तैयार किए षडय़ंत्र में तहसीलदार को भी शामिल किया है।
संजय ने कलेक्टर से मांग की है कि इसे मंदिर में पुन: पुजारी के पद पर रखा जाए और दोषी लोगों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।
