क्राइम
दिलरोज हत्याकांड: हत्यारिन की मिली फांसी की सजा
ढाई साल की मासूम को जिंदा दफन कर दी थी दर्दनाक मौत

वर्ष 2021 में देश भर को हिला देने वाले पंजाब राज्य के
बहुचर्चित दिलरोज हत्याकांड में आरोपी महिला को आज न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई है। आरोपी महिला नीलम ने एक ढाई साल की बच्ची को दर्दनाक मौत देते हुए जिन्दा दफन किया था, जिससे बच्ची की मौत हो गई थी। बच्ची के पिता पुलिस महकमे से जुड़े है और इनकी पड़ोसन नीलम मासूम बच्ची से रंजिश रखती थी। इसी रंजिश के चलते वर्ष 2021 में आरोपी नीलम ने बच्ची दिलरोज को एक्टिवा पर बैठा कर ले जाया गया और सुनसान जगह पर दफना दिया था।
लुधियाना कोर्ट के जिला सत्र न्यायाधीश मुनीश सिंघल की अदालत ने स्थानीय एल्डिको एस्टेट वन के निकट वर्ष 2021 में एक 2 वर्ष 9 महीने के नाबालिग मासूम बच्ची दिलरोज के अपहरण और उसकी नृशंस हत्या के करने के आरोप में क्वालिटी रोड, शिमलापुरी, लुधियाना की महिला नीलम को आज फांसी की सजा सुनाई है।
पीडि़त बच्ची के दादा शमिंदर सिंह के बयान के बाद 28 नवंबर, 2021 को शिमलापुरी थाने में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक़ महिला आरोपन नीलम का चाल-चलन ठीक न होने के कारण उसका पुत्र अपनी पत्नी को उससे मिलने से रोकता था,जिस कारण नीलम उसके पुत्र से रंजिश रखने लगी व बदला लेने की नीयत से उसने उसकी पोती जो गली में खेल रही थी को बहला-फुसला कर अपने ऐक्टिवा पर बिठा लिया व उसे हुसैनपुरा के निकट एल्डिको एस्टेट के पास सडक़ के किनारे एक सुनसान जगह पर ज़मीन खोदकर जिंदा दफऩा दिया,जिससे दम घुटने से मासूम बच्ची की मृत्यु हो गई।बाद में महिला को भी मोके पर पकड़ लिया गया। अदालत में अभियोजन पक्ष ने कऱीब 26 गवाह पेश किए थे।
कोर्ट में बहस के दौरान बताया गया कि आरोपी को पता था कि जिंदा दफनाए जाने पर मृतक की दम घुटने से मौत हो जाएगी और रेत/मिट्टी नाक, सांस की नली, फेफड़ों और फिर खून में और मुंह, आंख और कान में भी जा सकती है, जो इस मामले में हुआ। ऐसे मामलों में मौत बहुत दर्दनाक होती है क्योंकि मृतक सांस नहीं ले पाता। दरअसल, जिंदा दफनाए जाने की घटना भयानक मौत की सूची में काफी ऊपर है।
बहुचर्चित दिलरोज हत्याकांड में आरोपी महिला को आज न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई है। आरोपी महिला नीलम ने एक ढाई साल की बच्ची को दर्दनाक मौत देते हुए जिन्दा दफन किया था, जिससे बच्ची की मौत हो गई थी। बच्ची के पिता पुलिस महकमे से जुड़े है और इनकी पड़ोसन नीलम मासूम बच्ची से रंजिश रखती थी। इसी रंजिश के चलते वर्ष 2021 में आरोपी नीलम ने बच्ची दिलरोज को एक्टिवा पर बैठा कर ले जाया गया और सुनसान जगह पर दफना दिया था।लुधियाना कोर्ट के जिला सत्र न्यायाधीश मुनीश सिंघल की अदालत ने स्थानीय एल्डिको एस्टेट वन के निकट वर्ष 2021 में एक 2 वर्ष 9 महीने के नाबालिग मासूम बच्ची दिलरोज के अपहरण और उसकी नृशंस हत्या के करने के आरोप में क्वालिटी रोड, शिमलापुरी, लुधियाना की महिला नीलम को आज फांसी की सजा सुनाई है।
पीडि़त बच्ची के दादा शमिंदर सिंह के बयान के बाद 28 नवंबर, 2021 को शिमलापुरी थाने में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक़ महिला आरोपन नीलम का चाल-चलन ठीक न होने के कारण उसका पुत्र अपनी पत्नी को उससे मिलने से रोकता था,जिस कारण नीलम उसके पुत्र से रंजिश रखने लगी व बदला लेने की नीयत से उसने उसकी पोती जो गली में खेल रही थी को बहला-फुसला कर अपने ऐक्टिवा पर बिठा लिया व उसे हुसैनपुरा के निकट एल्डिको एस्टेट के पास सडक़ के किनारे एक सुनसान जगह पर ज़मीन खोदकर जिंदा दफऩा दिया,जिससे दम घुटने से मासूम बच्ची की मृत्यु हो गई।बाद में महिला को भी मोके पर पकड़ लिया गया। अदालत में अभियोजन पक्ष ने कऱीब 26 गवाह पेश किए थे।
कोर्ट में बहस के दौरान बताया गया कि आरोपी को पता था कि जिंदा दफनाए जाने पर मृतक की दम घुटने से मौत हो जाएगी और रेत/मिट्टी नाक, सांस की नली, फेफड़ों और फिर खून में और मुंह, आंख और कान में भी जा सकती है, जो इस मामले में हुआ। ऐसे मामलों में मौत बहुत दर्दनाक होती है क्योंकि मृतक सांस नहीं ले पाता। दरअसल, जिंदा दफनाए जाने की घटना भयानक मौत की सूची में काफी ऊपर है।
