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विकासखण्डों पर जनसुनवाई के बाद अफसरों की क्लास लेगे कलेक्टर

रतलाम
पहले वाले साहब को जनप्रतिनिधियों से मुलाकात अच्छी नही लगती थी, नई साहब ने खुद को जनता से दूर कर लिया। जिले में 17 साल बाद 18 अगस्त मंगलवार से जनसुनवाई का स्वरुप बदल रहा है और जनता अब अपने अपने विकासखण्ड पर होने वाली जनसुनवाई में भी आयुक्त या अनुभाग के अधिकारी को सुनाकर अपनी समस्याओं का निराकरण कराने का प्रयास करेगी।
सामान्य विभाग प्रशासन के 30 जून 2009 के आदेश का असर दो चार साल तक रहा और उसके बाद विभागीय स्तर पर होने वाले जनसुनवाई कार्यक्रम ठप्प हुए तो जिले भर की जनता ने जिला मुख्यालय पर होने वाली जनसुनवाई में आमद देना शुरु कर दी थी। आज हालात ये है कि हर मंगलवार को शहर सहित जिलेभर से 200 से ज्यादा आवेदन जिला स्तरीय जनसुनवाई में पहुच रहे है।
नवागत कलेक्टर ने वर्ष 2009 के आदेश को फिर जिन्दा करते हुए सात विकेन्द्रीकृत जनसुनवाई केन्द्र स्थापित किए है। इसमें नगर निगम आयुक्त से लेकर विकासखण्ड के अनुविभागीय अधिकारी को जनसुनवाई के लिए पांबद किया है।
कलेक्टर ने निर्देश में स्पष्ट किया है कि विकासखण्ड स्तर पर होने वाली जनसुनवाई के दोपहर 1 बजे समाप्त होने के बाद सातों जनसुनवाई केन्द्र वीडिय़ों काँफ्रेसिन्ग के माध्यम से जिला मुख्यालय से जुड़ेगे। जिला स्तर से सातों केन्द्रों की समीक्षा होगी। प्रत्येक केन्द्र का नेतृत्व करने वाले अधिकारी जनसुनवाई से जुड़ी जानकारी देगे और इस दिन की दो उल्लेखनीय आवेदनों के सफल निराकरण आवेदनों से भी अवगत कराएगे।
कलेक्टर ने जारी निर्देश में यह भी स्पष्ठ किया है कि विकासखण्ड स्तर पर होने जनसुनवाई केवल नए आवेदन प्राप्त करने तक सीमित नही रहेगी। यहां पूर्व जनसुनवाईयों के लंबित प्रकरणों तथा संबधित क्षेत्र की गंभीर-लंबित सीएम हेल्प लाईन शिकायतों की भी समीक्षा कर उनके प्रभावी निराकरण का प्रयास किया जाए। जनसुनवाई की सफलता का मूल्याकंन प्राप्त आवेदनों की संख्या के स्थान पर मौके पर और समय सीमा में वास्तविक रुप से निराकृत समस्याओं के आधार पर किया जाए।

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