स्पंदन संस्था: ले तो आए हो, हमे सपनों के गांव में, प्यार की छांव में बिठाए रखना
रत्नपुरी स्पंदन संस्था द्वारा राष्ट्रीय दृष्टिहीन फुटबाँल खिलाडिय़ों के सहायतार्थ आयोजित संगीत निशा में गायकों ने समा बांधा

रतलाम( अनिल पांचाल)
ले तो आए हो हमे, सपनों की गांव में, प्यार की छाँव में बैठाए रखना..सजना ओ सजना, फिर छिड़ी रात बात फूलों की, रात है या बारात फूलों की। फूल के हार फूल के गजरे, शाम फूलों की रात फूलों की। सजना है, मुझे सजना है के लिए, फकीर चल चला चल और राम तेरी गंगा मैली हो गई, पापियों के पाप धोते-धोते..। विश्व प्रसिद्व गीत व संगीतकार रविन्द्र जैन और ख्यातनाम संगीतकार खय्याम के सुरीली गीत-संगीत से सजाएं उक्त जैसे तमाम गीतों की प्रस्तुति बीति रात रत्नपुरी स्पंदन संस्था द्वारा राष्ट्रीय दृष्टिहीन फुटबाँल खिलाडिय़ों के सहायतार्थ आयोजित संगीत निशा में गायकों ने दी है।
शहर के न्यू रोड़ स्थित गुजराती स्कूल परिसर में आयोजित इस संगीत निशा का इंतजार सुधि श्रोता साल भर से करते रहते है। रविवार रात जब सुरेले गीत-संगीत की यह महफिल सजी तो हर कोई वाह कह उठा था।
संगीत के इस भव्य समारोह में जब वरिष्ठ गायक अंचल शुक्ला, श्रीमती लक्ष्मी गामड़, अय्यूब खान,संगीत जैन, भुवी व्यास, अलक्षेन्द्र व्यास, नरेश यादव और मनोज भावसार आदि एक के बाद एक बेहतरीन प्रस्तुति देने मंच पर उतरे तो हर एक की कलात्मक प्रस्तुति के बीच कलाकार और दर्शक का जुड़ाव बनता गया। विविधतापूर्ण गीत- संगीत के बीच रचनात्मक तालमेल, उचित ध्वनि व्यवस्था, अलग-अलग गानों के मूड के हिसाब से स्टेज पर रोशनी का इस्तेमाल, स्टेज (मंच) की उम्दां डिजाईन, श्रोताओं के लिए बैठने की समुचित व्यवस्था और समय का पालन का पालन इस गीत संगीत निशा की खाशियत रही थी। कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। स्वागत भाषण स्पंदन अध्यक्ष अचल शुक्ला ने दिया।
वाईस आँफ रतलाम के रुप में अपनी पहचान रखने वाले अय्यूब खान ने फकीरा चल चला चल सहित आधा दर्जन प्रस्तुति देकर खूब रंग जमाया। नीमच अपर कलेक्टर व वरिष्ठ समाजसेवी श्रीमती लक्ष्मी गामड़ ने सजना है, मुझे सजना के लिए सहित रविन्द्र जैन और खय्याम के संगीत में सजे गीतों की प्रस्तुति देकर गायकी में अपनी अलग पहचान एक बार फिर छोड़ी है। इस मौके पर अपर कलेक्टर श्रीमती लक्ष्मी गामड़ ने ले तो आए हो हमें सपनों के गांव में, सजना हैं मुझे सजना के लिए, दिल में तुझे बिठा के कर लूंगी,कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया,तेरा फूलों जैसा रंग , हज़ार राहें मुडक़र देख,मोहब्बत बड़े काम की चीज है, जैसे गीतों की उम्दा प्रस्तुति देकर श्रोताओं की दिलों में अलग मुकाम बनाया।
गायिका और संगीत शिक्षक श्रीमती संगीता जैन ने गीतों की प्रस्तुति देकर समा बांधा, वही अंचल शुक्ला, नरेश यादव आदि ने रविन्द्र जैन और खय्याम के गीत संगीत से सजे गीतों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं की खूब दाद बटोरी।
मन की आँखों से देखे सपने संभव बना देते है
रतलाम रेंज के डीआईजी ने निमिष अग्रवाल ने इस अवसर पर कहां कि मन की आंखों से देखे गए सपने असंभव काम को भी संभव बना देते हैं इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हमारे राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के नेत्रहीन खिलाडिय़ों ने करके दिखाया है। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार सर ने कहा कि स्पंदन मानव सेवा का यह कार्य बहुत ही अच्छे तरीके से कर रही है जो समाज में प्रेरणा देता है। इस अवसर पर रतलाम डीएसपी अजय सारवान ने कहा कि जहां आंखें होने के बाद भी लोग जो काम नहीं कर पाते हैं, वह दृष्टिहीन बच्चे कर रहे हैं जो प्रशंसनीय है।
संस्था संरक्षक दिनेश सियाल (वाइस प्रेसिडेंट इप्का लैबोरेट्रीज) ने कहा कि स्पंदन की पूरी टीम दृष्टिहीन बच्चों के लिए कार्य करने के लिए समर्पित है।
अपर कलेक्टर श्रीमती लक्ष्मी गामड़ ने कहा कि संगीत के माध्यम से मानव सेवा का यह अनूठा उदाहरण है। संस्था मार्गदर्शक नितिन तिवारी ने कार्यक्रम में सहयोग प्रदान करने के लिए रतलाम के गणमान्य नागरिकों का धन्यवाद दिया। इस अवसर पर पुलिस आरआई मोहन भर्रावत जी विशेष रूप से उपस्थित होकर कार्यक्रम की सराहना की।
राष्ट्रीय नेत्रहीन फुटबॉल खिलाड़ी अभिभूत हुए
राष्ट्रीय नेत्रहीन फुटबॉल खिलाडिय़ों पूजा यादव, प्रकृति गुप्ता, मुस्कान वर्मा एवं फरदीन खान उपस्थित रहे उन्होंने पूरे कार्यक्रम की प्रशंसा की और ऐसे आयोजन को महसूस कर अभिभूत हो गए।
11 लाख से ज्यादा राशि एकत्र हुई
स्पंदन के इस वर्ष के प्रोग्राम में 11,37,230 /- ( ग्यारह लाख सेंतीस हजार दो सौ तीस) रुपये राशि एकत्रित हुई। इसमें से राष्ट्रीय नेत्रहीन फुटबॉल खिलाडिय़ों , जन चेतना परिषद मुक-बधिर स्कूल , मातृछाया संस्था रतलाम , अपना घर संस्था रतलाम एवं देवास दृष्टिहीन कन्या केंद्र को कार्यक्रम के अंत में अतिथियों द्वारा चेक प्रदान किये गए ।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में स्पंदन संस्था के लगभग 80 से अधिक सदस्य टीम ने अपने अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए कार्यक्रम को उच्चाईयाँ प्रदान की । कार्यक्रम के अंत में आभार विक्रम कोठारी ने किया व कार्यक्रम का संचालन गीत ओर कविताओं के साथ गीतकार अलक्षेन्द्र व्यास ने किया।

