कुतुब मीनार पर मालिकाना हक का दावा खारिज
पूर्व में भी हक को लेकर कई याचिकाएं खारिज की जा चुकी है

दिल्ली की साकेत कोर्ट के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश दिनेश कुमार ने आज कुतुब मीनार और पूरी दक्षिणी दिल्ली की जमीन पर मालिकाना हक का दावा कर तीसरा पक्ष बनाने की मांग करने वाले कुंवर महेंद्र ध्वज प्रसाद सिंह की अर्जी खारिज कर दी।
बताया जाता है कि इस मामले में एक आवेदक ने दावा किया था कि 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, न तो भारत सरकार और न ही बेसवान अविभाज्य राज्य बेसवान ने कोई संधि, परिग्रहण या विलय समझौता किया। यह दावा किया गया है कि कोई अधिग्रहण प्रक्रिया नहीं हुई है, और इस प्रकार बेसवान परिवार के बेसवान अविभाज्य राज्य को रियासत का दर्जा प्राप्त है, स्वतंत्र, और जुमुना और गंगा नदियों के बीच चलने वाले संयुक्त प्रांत आगरा के सभी क्षेत्रों का स्वामित्व और स्वामित्व रखता है। आगरा से मेरठ, अलीगढ़, बुलंदशहर और गुडग़ांव।
एएसआई के अनुसार, दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले साल एक सुल्ताना बेगम द्वारा दायर इसी तरह की याचिका को खारिज कर दिया, जिसने लाल किले पर कब्जा करने की मांग करते हुए अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर द्वितीय की विधवा होने का दावा किया था। उसकी याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि उसने बहुत देर से अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
