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ये रिश्ता क्या कहलाता है: रतलामियों के गुलदस्ते मुरझा गए

रतलाम। बीते कुछ सालों से रतलाम में कुछ ऐसे अफसरों की तैनाती हुई है, जो या तो इन्दौर, उज्जैन या मालवा के कुछ हिस्सों से ताल्लुक रखते है या पहले किसी पद पर रतलाम में रहे हो और दौबारा किसी न किसी पोस्ट पर उनकी तैनाती रतलाम में ही हो गई हो। ऐसे में इनके रतलाम आते ही इनके वे चाहने वाले या इनके माध्यम से लाभ लेने वाले भी पीछे-पीछे तक गुलदस्ते लेकर रतलाम चले आते है। इधर इनकी रिश्ते निभाऊं नीति के चलते गुलदस्ते लेकर खड़े रतलामियों का कई मर्तबा नम्बर ही नही आता और ये अपने मुरझाए गुलदस्तों के साथ घर लौट कर अपनी बारी का इंतजार करते रहते है।
इसी रिश्ते निभाऊ स्पर्धा के चलते कुछ सालों से रतलामी उदास है। पहले या कुछ समय पहले तक रतलाम में गुलदस्ता प्रतियोगिताएं रतलामियों के मध्य ही चला करती थी। जैसे ही कोई नया अफसर आता है वैसे ही पहचान बढ़ाने की गरज से कुछ चुंनिदा गुलदस्ते लेकर चेम्बर के बाहर पहुच जाते थे। गुलदस्ता भेंट किया जाकर परिचय दिया जाता कि – साहेब में ढिमकाचंद पुछड़ालाल हू, कभी सेवा का अवसर दीजिए। मगर जैसे -जैसे आसपास तैनात रहे अफसरों की जमावट शुरु हुई वैसे-वैसे गुलदस्ता पाँलीटिक्स पर इन्दौर, उज्जैन और आसपास के लोगों का आना जाना शुरु हो गया।
अब अफसर भी रिश्ते निभाते हुए अपने बाहरी साथियों, समर्थकों और जान पहचान वालों को या उनके जान पहचान वालों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रुप से लाभ देने लगे। पूर्व में पदस्थ रहे एक अफसर ने तो अपने किसी खास दोस्त के साथ इतना प्यार भरा रिश्ता निभाया कि एक काम के लिए उसे पूरे एक करोड़ का ठेका दे दिया। इस ठेके का हश्र ये हुआ कि पूरा शहर नर्क बनने की कगार पर आ गया। मगर प्यारे रिश्ते का गठजोड़ ऐसा था कि कोई चू-चपड़ भी नही कर पाया। इनके पहले भी एक की तैनाती हुई तो शहर के तमाम जमीनखौर हर शनिवार को मुंह पर माँस्क या गमछा बांध कर रिश्ते बताने, निभाने पहुच जाया करते थे।
ऐसे में हालात ऐसे बनते है कि रतलामी जब मिलने जाते है तो जवाब मिलता है कि बाहर से साहब के कोई मित्र, रिश्तेदार, जान पहचान वाले मिलने आए है, टाईम लगेगा, आप इंतजार करे।
हर तरफ वाँट लगी पड़ी है। कोई जिम्मेदार नाच गा कर अपना समय बीता रहा है तो कोई बैठकों में अपने ही अमले को ठास कर खुद को सुशासक बताने की जुगाड़ लगा रहा है। विकास का विजन धराशायी है और जिन्हे जनकाज करना है वो रिश्ते निभाकर अपना समय पूरा कर रहे है।

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