नाजुक बच्चा तहसीलदार की निजी कठिनाई है, कोर्ट ने याचिका खारिज की

रतलाम
शहर तहसीलदार का तबादला प्रशासकीय स्तर पर रतलाम से नीमच कर दिया गया था। मगर ये शासन को चुनौती देते हुए कोर्ट की शरण में आदेश स्थगित कराने चले गए। तहसीलदार ने अपने नवजात बच्चे के स्वास्थ्य का हवाला दिया था। मगर कोर्ट में यह हवाला काम नही आया और इनकी याचिका खारिज कर दी गई है।
अपने तबादला आदेश को चुनौती देते हुए तहसीलदार उर्फ याचिकाकर्ता के वकील का कहना है कि वे आईवीएफ ट्रीटमेंट से पिता बने हैं और 2 महीने का बच्चा बहुत कमज़ोर है, जिसे सही मेडिकल देखभाल की ज़रूरत है। 15 जून के आदेश के ज़रिए याचिकाकर्ता का तबादला रतलाम से नीमच कर दिया गया है। रतलाम और नीमच के बीच की दूरी 290 किमी है, इसलिए किसी भी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में सही मेडिकल देखभाल तक पहुँचने में बहुत समय लगेगा। इसलिए, तबादले का यह आदेश तबादला नीति के अनुसार नहीं है और इससे याचिकाकर्ता को बहुत परेशानी होगी।
कोर्ट ने माना है कि स्थानातंरण नौकरी का एक ज़रूरी हिस्सा है और कोर्ट ट्रांसफर के आदेश में दखल देकर प्रशासनिक अव्यवस्था पैदा करने में शामिल नहीं हो सकता। प्रशासन की तरफ से कोई गलत मंशा होने का आरोप न होने पर ऐसे मामलों पर विचार नहीं किया जा सकता। अगर संबंधित अथॉरिटी को प्रशासन के व्यापक हित में ऐसा ट्रांसफर ज़रूरी लगता है, तो असरदार प्रशासन के लिए ऐसा ट्रांसफर ज़रूरी है और ऐसे प्रशासनिक काम में दखल देने से प्रशासन की प्रक्रिया में बेवजह मुश्किलें पैदा होती हैं। भारत के संविधान के आर्टिकल 226 के तहत इस कोर्ट के दखल की ज़रूरत वाला कोई मामला नहीं बनता है। इसलिए, यह याचिका खारिज की जाती है।
