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मेले में ठगाई नगर निगम अब कोर्ट में रखी अपना पक्ष

मेले में ठगाई नगर निगम अब कोर्ट में रखी अपना पक्ष
रतलाम
शहर के आम्बेडकर खेल मैदान में विगत 15 अप्रेल से जारी राजस्थान मेगा ट्रेड फेयर के संचालक ने कोर्ट के निर्देश पर अपना मेला खोल लिया है, और यहां ग्राहकों की आवाजाही भी शुरु हो चुकी है। इधर स्थगन के बाद अपनी बात रखने के लिए नगर निगम के जिम्मेदार भी नगर निगम की सेवा से जुड़े वकीलों से विचार विमर्श करने के लिए सक्रिय हो चुके है। संभवत: हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए निगम के जिम्मेदार राजस्व की बकाया राशि वसूलने का प्रयास करेगे।
जानकारों के अनुसार राजस्थान मेगा ट्रेड फेयर के संचालक ने गत 15 अप्रेल को नगर निगम के राजस्व विभाग से मेला लगाने की अनुमति ली थी, मगर यह मेला 18 अप्रेल से पूरी तरह से शुरु हो पाया था। इसी बीच चार दिन की बरसात और गत 9 मई को मेला सील किए जाने के बाद मेले की ग्राहकी पर भारी असर पड़ा था।
नगर निगम ने मेला संचालक को 65 लाख की वसूली से ज्यादा का नोटिस भेजा था, संचालक इस मामले में माण्डली के पक्ष में भी था, मगर बात नही बन पाने के कारण संचालक ने कोर्ट की शरण लेकर स्थगन प्राप्त कर लिया है।
विधि के जानकारों के अनुसार मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय इंदौर में 2025 के डब्ल्यूपी क्रमांक 18491 (अशोक कुमार जैन बनाम नगर निगम) दिनांक17-05-2025 श्री मनीष यादव – याचिकाकर्ता के अधिवक्ता। प्रवेश और अंतरिम राहत के प्रश्न पर सुनवाई हुई। प्रक्रिया शुल्क के तीन कार्य दिवसों के भीतर भुगतान करने पर प्रतिवादियों को दस्ती नोटिस जारी किया जाए, जो एक सप्ताह के भीतर वापस किया जा सके। विवाद को ध्यान में रखते हुए, प्रतिवादियों को याचिकाकर्ता के परिसर को खोलने का निर्देश दिया जाता है, साथ ही प्रतिवादियों को 19 मई 2025 को उल्लेख करने की स्वतंत्रता दी जाती है। मामले को 26 मई 2025 को सूचीबद्ध करने के भी आदेश दिए गए है।
इधर नगर निगम से जुड़े विधि के जानकार पूरे मामले को खंगालने में जुटे हुए है। मगर संभावना व्यक्त की जा रही है, कि नगर निगम अपना पक्ष मजबूती से रख पाए इसमें भी संशय बना हुआ है, क्यूकि मेला आयोजन के लिए जमीन आवंटन की कार्रवाई ही कुछ खामियों से भरी हुई है।े
बहरहाल, राजस्थान मेला आयोजन को लेकर फिलहाल जहां एक और संचालक ने राहत की सांस ली है, वही नगर निगम के जिम्मेदारों की सांस अपनी साख बचाने के लिए फूली हुई नजर आ रही है। संभावना ये भी व्यक्त की जा रही है कि कुछ राशि जमा कराने के बाद संचालक को पूरी राहत मिल सकती है।

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