
( खबरों की कबर. . )
165(6) की जांच चरम पर कई नपेगें
आदिवासियों की बहुमूल्य जमीन कोढिय़ों के भाव शहर के जमीन के जादूगरों को बगैर किसी सक्षम अनुमति के देने वाले जिले के पूर्व अफसरोंल कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी होने जा रही है। इस मामले की शिकायत में पाया गया था कि आदिवासियों की जमीन को शहर के जमीनखौरों को देने वाले तत्कालीन अपर कलेक्टर डाँ. कैलाश बुंदेला मास्टर मांईड थे। इसी के साथ ही उस समय के एसडीएम, तहसीलदार और पटवारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है।
मेडिकल कालेज के आसपास की इन जमीनों की बिक्री को लेकर हुई शिकायत की जांच पूर्व कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने कर प्रतिवेदन संभागायुक्त को भेजा था। संभाग आयुक्त स्तर से हुई जांच में पाया गया है कि मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता की धारा 165(6) को ताक में रखते हुए डां. बुंदेला ने रतलाम में अपर कलेक्टर रहते हुए 20 प्रकरणों में लिखा है कि ऐसे मामलों में कलेक्टर सहित किसी की अनुमति की जरुरत नही है, ये जमीन बेची जा सकती है।
बहरहाल, जमाने के सामने ईमानदार और उजले बनने व दिखने वाले जमीनखौरों की कलाई जल्द ही खुलने वाली है और गरीबों की जमीन खाने वालों के स्वागत के लिए पुलिस अमला भी तैयार है।
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सादिक ने खोली पोल, नेताजी कर गए गोल
रतलाम शहर की स्वच्छता को लेकर चल रही नौंटकी और जमीनी हकीकत से जनता वाकिफ है। ऐसे में सफाई व्यवस्था संभालने वाले भी आर्थिक मस्ती का भरपूर आंनद ले रहे है।
मिर्गी के दौरों की तरह सफाई व्यवस्था मेें सुधार के नाम पर समय-समय बैठके भी होती है, जो बैनतीजा रहती आई है। ऐसी ही एक बैठक का आयोजन 3 अक्टूबर 2024 को विधायक भवन में किया गया। इस बैठक के लिए ऐजेण्डा- निर्देश निकालने वाले स्वास्थ्य अधिकारी ने स्वास्थ्य समिति के चेयरमेन को लिखित में आमंत्रण नही दिया, मगर वे बगैर बुलाए पहुच गए।
खैर, इसी भरी बैठक में एक वार्ड के मैजिक चालक ने सभी जिम्मेदारों के सामने शिकायत दर्ज कराई कि उसके कचरा संग्रहण वाहन का हेल्पर विशाल पिछले चार माह से नौकरी पर नही आ रहा है, मगर नगर निगम से उसका वेतन हर माह निकल रहा है। ये सुनकर जिम्मेदारों के कान खड़े हुए तो हाजिरी रजिस्टर आदि मंगवाए गए, जिनमें कांटछांट थी। लेखापाल ने भी वेतन निकाले जाने की पुष्ठि कर दी। सादिक का कहना था कि अगर मेरी बात पर विश्वास नही हो तो जुलवानिया टे्रचिंग गाउण्ड पर लगे सीसीटीवी कैमरे चेक किए जा सकते है, उनके कही हेल्पर विशाल नजर नही आ रहा है। बैठक में जिम्मेदारों ने जितनी गंभीरता से सादिक की शिकायत को लिया गया उतनी ही तेज गति से इस शिकायत को गोल भी कर दिया गया। बाद में पता चला कि झोन प्रभारी की मिलीभगत और आती-पाती के चलते हेल्पर बगैर काम के हर माह वेतन लेता आ रहा था।
बहरहाल, ये मामला एक उदाहरण है, ऐसे प्रकरण हर वार्ड में मौजूद है, जिसके चलते होने वाली आय का लाभ सफाई व्यवस्था से जुड़े शूरवीर उठा रहे है।
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चाकू ले जाओं, शिकायत कटवाओं ?
लाखों घोषणा कर दी और हजारों योजनाएं शुरु कर दी, मगर खजाना हर तरफ खाली है। नतीजन हितग्राहियों के खाते में लाभ नही पहुच पा रहा है और वो सीएम हेल्प लाईन सहित अन्य माध्यमों में शिकायते दर्ज करा रहे है। इधर शिकायतों का दायरा बढऩे लगा तो जिले के आला अधिकारियों के चेहरों की हवाईयां उड़ी हुई है और वो विभाग प्रमुखों या योजनाओं का संचालन करने वाले अफसरों को भला बुरा कहकर अपना गुस्सा उतार रहे है। प्रादेशिक सूत्रों की माने तो खजाना खाली होते देख भोपाली अफसरों ने भी पोर्टल और भुगतान से जुड़ी संबधित लिंक को खराब कर दिया या उन पर एरर डाल दिया है। ऐसे में हितग्राही दर दर की ठोकरे खाकर शिकायते करने का मजबूर है। इधर जिले के अधिकारियों का दबाव है कि संबधित अधिकारी और कर्मचारी शिकायतकर्ता पर दबाव बना कर शिकायते कटवाए। इधर विभाग प्रमुखों व कर्मचारियों का कहना है कि अब हम क्या …. चाकू डंडे से धमका कर शिकायते कटवाएं।
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पत्थरबाजी कांड: राजस्व व पुलिस में समन्वय का अभाव
पिछले दिनों शहर के एक हिस्से से निकल रहे चल समारोह में हुई पत्थरबाजी के बाद जो हंगामा हुआ, उसके लिए पुलिस कटघरे में खड़ी हुई और कप्तान का ताबड़तोड़ तबादला हो गया। अब जांच शुरु हुई है और जांच का जिम्मा उन्हे सौपा गया है, जो घटना के समय जिला प्रशासन के मुखिया के अवकाश पर होने के कारण उनकी जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। घटना स्थल से लेकर थाने पर हंगामे के दौरान राजस्व अमला कहा था? ये चर्चा का विषय बना हुआ है, मामले ने जब ज्यादा उबाल लिया तो कई भेले हो चुके थे। इस पत्थरबाजी और हंगामे को रोका जा सकता था, अगर राजस्व अमले और पुलिस के बीच सूचना और संचार तंत्र का समन्वय बना होता।
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किसान रैली: बगैर खर्चे से टे्रक्टर की सवारी
किसान हर तरफ समस्याओं से जूझ रहे है और जिम्मेदारों के कानों पर जू तक नही रेंग रही है। किसानों के इस दर्द को सैलाना के पूर्व विधायक हर्ष गेहलोत ने समझा और जिला स्तर पर किसान उर्फ टे्रक्टर रैली निकालने की इच्छा अपनी पार्टी के पदाधिकारियों के सामने जाहिर की, मगर रतलाम ग्रामीण सहित अन्य विधानसभा क्षेत्रों के नेताओं ने फटीचर होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया। ऐसे में हर्ष बोले कि पार्टी ने मुझे सम्मान दिया है और इस पार्टी के मान के लिए मै तो किसानों की समस्याओं को लेकर रैली आदि निकाल कर शासन-प्रशासन का विरोध करुगा। हर्ष गेहलोत ने पार्टी और किसानों के सम्मान में विशाल रैली भी निकाली वही खाली जेब रैली में गए फोटो छाप नेता खड़े टे्रक्टर पर फोटो खिचवाने कर लौट आए।
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इधर खोदा-उधर खुदा …. जनता तू तेरी…
शहर की सडक़ों की गुणवत्ता पर सवाल उठे और फाईले बरामद हुई तो नगर के पालनहारों ने हर तरफ खुदाई शुरु करवा दी। कुछ सडक़ों पर भोगले (पाईप) बिछाने के नाम पर सडक़ों की खुदाई हो रही है, तो कही अन्य कारणों से सडक़ों को उबड़-खाबड़ किया जा रहा है। इधर अवतरत हुई बरसात ने चारों तरफ कचड़घान कर रखा है, वो दिक्कत अलग है। आगामी दिनों में नवरात्र पर्व शुरु होने जा रहा है और नंगे पैर चल कर देवी दर्शन के लिए आने-जाने वाली माता-बहनों और काली भक्तों को अनेक दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा ये भी तय है।
गली-गली शौर है कि हर तरफ चोर है। नगर निगम परिषद में पक्ष अपने ही घर में बैठे चोरों से त्रस्त है, तो विपक्ष शहर को छोड़ कर देश और प्रदेश की समस्याओं का विरोध कर ज्ञापन देने में ही मस्त है।
शहर का कोई धणीधोरी बचा नही है, ऐसे में जनता परेशानी झेलती है, मगर चुनाव के समय यह भी कहती है कि आएगा.. तो…ही..।
बहरहाल.. इधर भी खुदा हुआ है और उधर भी खोदा जा रहा है, ऐसे में जनता तू तेरी मर्जी से जिधर से जाना हो उधर से निकल जा।
