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कब के बिछड़े.. आज यहां आ के मिले: कुटुम्ब न्यायालय ने पति-पत्नी को सकुशल घर भेजा

रतलाम
पति-पत्नी का पवित्र बंधन को विच्छेद करने के लिए न्यायालय आए दंपत्ति को कुटुम्ब न्यायालय ने पुन: एक सूत्र में बांध कर खुशी खुशी घर भेज दिया।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार पत्नी ‘एक्स‘ एवं पति ‘वाय‘ के मध्य अप्रैल 2022 मे ंविवाह होने के पश्चात् वैचारिक मतभेद होने से वे 23 अप्रैल 2024 से पृथक-पृथक निवास करने लगे और उनके द्वारा 6 अगस्त 2025 को सहमति से विवाह विच्छेद हेतु याचिका प्रस्तुत की गई थी। उभयपक्ष की एक पुत्री भी पैदा हुई थी। उभयपक्ष को उनके पृथक-पृथक निवास करने से उनकी पुत्री के भविष्य पर पडऩे वाले विपरीत प्रभाव के बारे में समझाइश दी गई तथा साथ-साथ रहने पर उनके एवं पुत्री के भविष्य में क्या-क्या फायदा होंगे, इसके संबंध में भी उन्हें समझाइश दी गई जिस पर उनके द्वारा साथ निवास करना स्वीकार किया और नेशनल लोक अदालत में उपस्थित होकर प्रकरण में कार्यवाही समाप्त कराने के उपरांत निवास करने हेतु साथ में चले गये।
इसी प्रकार पत्नी ‘एक्स‘ द्वारा स्वयं एवं पुत्र के भरण पोषण हेतु पति ‘वाय‘ के विरूद्ध याचिका प्रस्तुत की थी, जिसमें उसके द्वारा पति एवं उसके परिजनों के विरूद्ध दहेज के लिये प्रताडि़त किये जाने एवं खाने पीने का सामान छिपाकर रख देने के आक्षेप लगाये गये थे। उभयपक्ष का दिनांक 21.06.2022 को विवाह हुआ था, लेकिन लगभग 05 माह बाद ही वे प्रथक निवास करने लगे थे। उभयपक्ष को वैवाहिक महत्व के बारे में समझाया गया और साथ रहने के सुखद परिणाम तथा पृथक रहने के दुष्प्रभावों के संबंध में समझाइश दी गई। उभयपक्ष के अधिवक्तागण द्वारा भी पक्षकारों को समझाया गया, जिसके उपरांत उनके द्वारा नेशनल लोक अदालत में साथ रहने का निर्णय लिया गया और आज साथ रहने के लिये रवाना हो गये।
इसी प्रकार दो अन्य प्रकरण भी पत्नी द्वारा पति के विरूद्ध भरण पोषण दिलाये जाने हेतु पेश किये थे जिनमें भी उनको समझाइश दिये जाने के उपरांत वे साथ निवास करने हेतु सहमत हुए और उन्हें साथ में निवास करने हेतु न्यायालय से भेजा गया।
साथ जाने वाले पक्षकारों को प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुश्री नीना आशापुरे, की ओर से सुखद भविष्य के लिये पौधे भी भेंट किये गये तथा उन्हें एवं उनके परिजनों को मिठाई खिलाई जाकर सुखद भविष्य की शुभकामनाएं देकर साथ रहने हेतु भेजा गया।

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