रतलाम की ख़बरें

रतलाम शहर में नसबंदी के बाद 24 हजार कुत्ते गायब

रतलाम
नगर पालिक निगम रतलाम ने अपने घोटाला की फेरहिस्त में एक और अध्याय जोड़ते हुए इस मर्तबा आवारा कुत्तों की नसबंदी के नाम पर 2.80 करोड़ हजम कर लिए है। पूर्व कलेक्टर व प्रशासक ने स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से 2021 से 2024 के बीच 27 हजार से ज्यादा कुत्तों के बधियाकरण का दावा कर ढाई करोड़ रुपए खर्च कर दिए, जबकि वर्ष 2025 में हुए एक सर्वे में पता चला है कि शहर सीमा के 49 वार्डो में कुत्तों की संख्या मात्र 3 हजार ही है।
सुप्रीम कोर्ट ने नई दिल्ली में कुत्तों को शेल्टर होम पंहुचाने के आदेश के बाद पूरे देश में कुत्तों के बचाव और नियंत्रण को लेकर एक संजीदा वातावरण बनने लगा । इस बीच विश्व स्वास्थ्य संघ की इस रिपोर्ट में भी मामलें को अधिक गरम कर दिया कि दुनियां में कुत्तों के काटने से लगभग 55 हजार लोगों की मौत होती है जिसमें भारत का पहला स्थान है ।
देश में कुत्तों की संख्या ,कुत्तों से खतरे और नियंत्रण को लेकर गर्माए माहौल में मध्यप्रदेश भी अछूता नहीं रहा और कुत्तों के नियंत्रण के लिए स्थानीय निकायों की सतर्कता और अब तक किए गए काम की पड़ताल होने लगी । इसी पड़ताल में चौकाने वाले स्केम सामने आया है । कहते हैं कुत्तों को घी हजम नहीं होता लेकिन आदमी तो सब कुछ हजम कर सकता है इसी कहावत को चरितार्थ करते हुए रतलाम नगर निगम के कर्ता-धर्ताओं ने भ्रष्ट्राचार की ऐसी इबारत लिख डाली जिसके उजागर होने के बाद से रतलाम के रहवासियों ने आश्चर्य व्यक्त किया ।
दरअसल मामला कोई दो चार हजार रुपयों पर हाथ साफ करने का नहीं है बल्कि पूरे 2.8 करोड़ रूपयों को हड़पने का है । जुलाई 2025 में नगर निगम के ही एक सर्वे के मुताबिक शहर में में लगभग 2600 कुत्तें गिनती में लिए गए हैं और ये संख्या शहर की सीमा और 49 वार्डो में गिने गए सडक़ के कुत्तों की दर्ज की गई है लेकिन जब पूछा गया कि शहर में कुत्ता नसबंदी के तहत कितने कुत्तों की नसबंदी की गई है तो आंकड़ा 27 हजार कुत्तों की नसबंदी का सामने आया है ।
कुत्तों की नसबंदी के लिए 636/- ,786/- और 907/- के रेट तय किए जिन्हें बाकायदा पंजी में दर्ज कर भुगतान किया गया । देश और प्रदेश में अब तक बड़े बड़े घोटाले देखे गए हैं लेकिन कुत्तों के नाम पर घर भरने वाला शायद ये पहला घोटाला होगा जिसमें हाल हकीकत खुद आंकड़े बयान कर रहे हैं ।
जब शहर में 2025 में आंकलित कुत्तों की संख्या ही तीन हजार के आसपास है तो अनुमान लगाया जा सकता है कि कुत्तों की संख्या 2021 में क्या रही होगी ?
प्रदेश की आर्थिक अपराध ऐजेंसी के साथ आर्थिक अपराध अनुसंधान जैसी ऐजेंसियों को इस पूरे घोटाले की जॉच अपने हाथ में लेकर जबाबदारों से पूछना चाहिए कि कैसे मौजुदा संख्या का नौ गुना बंध्याकरण किया गया । घोटाले के तार अपने हाथ में लेकर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष को भी मामला उठाना चाहिए ताकि करोड़ों खाकर मौज से घुमने वाले भ्रष्ट्राचारियों के खिलाफ कार्यवाही हो सके ।
कुत्तों की फर्जी नसबंदी का सारा खेल इतनी सफाई से किया गया कि कोई
देखे तो सही सम-हजये । नगर पालिक निगम की आंतरिक लेखा समिति ने नसबंदी के लिए पकड़े गए कुत्तें,सर्जरी किए गए कुत्तों की संख्या के साथ कार्य पूर्णता का प्रमाणिकरण कर रखा है जबकि कुछ गिनती के कुत्तों को पकड़ कर उनके कान टैग किए गए ताकि प्रमाणित कराया जा सके कि कुत्ता प्रजनन क्षमता बाधित है । नगर निगम में ऑडिट सेल ने भी इस गोरखधंधें में अपना हिस्सा लिया और ऑडिट आब्जेशन नहीं लगाए ।
अब सवाल यह है कि 2025 में नसबंदी के लिए सर्वे में बताए गए कुत्तों की संख्या 2916 स्वानों का बंध्याकरण अभी किया जाना बाकी है । आंकड़ों की बयानी भ्रष्टाचारियों की कहानी । जन धन को गिरह करने वाले भ्रष्टाचारी अधिकारियों की कारगुजारियों का चिठ्ठा साफ हो जाने के बाद भी किसी सरकारी ऐजेंसी ने मामला गंभीर देखते हुए जॉंच का कदम नहीं उठाया है और ना ही नगर निगम परिषद के पक्ष और विपक्ष के नेताओं, पार्षदों और एमआईसी सदस्यों ने इस महाघोटाले पर गौर किया है।

Related Articles

Back to top button