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कोर्ट अवमानना को नोटिस मिलते ही पुलिस ने 14 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया

रतलाम
जिले के थानों में बैठी पुलिस और कप्तान के बाद दूसरे और तीसरे नम्बर पर जमे पुलिस अधिकारी जन शिकायतों को लेकर कितने संवेदनशील है, इसका उदाहरण बीते दिनों जावरा शहर में हुए एक घटनाक्रम के बाद मिला है। प्रेम विवाह करने वाले एक दंपत्ति पर युवती के परिजन इतने भारी पड़े कि जावरा शहर पुलिस सहित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक में पीडि़त दंपत्ति को परेशान कर बैघर करने वालों के आगे नतमस्तक हो गए। पुलिस अधिकारियों की लाचारी का आलम यह भी रहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन भी यह नही कर पाए। मगर जब पीडि़त दंपत्ति की अवमानना याचिका पर माननीय उच्च न्यायालय ने पुलिस को नोटिस जारी किया तो शुक्रवार रात जावरा शहर थाना प्रभारी ने नई दुल्हन की तरह तमाम तरह के नखरे दिखा कर 14 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।
जिले के जावरा शहर स्थित नासिरगंज में रहने वाले पीडि़त दंपत्ति के साथ मारपीट करने वाले 14 लोगों के खिलाफ बीति रात जावरा शहर पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया है। माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश का पालन नही करने पर दंपत्ति ने अवमानना याचिका दायर की थी। जिस पर उच्च न्यायालय ने रतलाम एसपी और जावरा शहर थाना प्रभारी को नोटिस जारी किया था।
मिली जानकारी के अनुसार पीडि़ता ने शिकायत दर्ज कराई है कि इसके घर वालों का कहना था कि अपने समाज में विवाह करने पर 10 लाख रुपए मिलते है। इस बात से नाराज पीडि़ता ने घर से भाग कर अपने ही मोहल्ले नासिरगंज में रहने वाले मोहन माली के साथ गत 21 सितम्बर को नीमच स्थित आर्य समाज कार्यालय पर विवाह कर लिया था और विवाह के बाद अपने पति के घर पर ही रह रही थी। इसी दौरान पीडि़ता के मायके पक्ष ने जावरा शहर थाने में अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी।
इस शिकायत के बाद पीडि़ता ने अपने पति के साथ थाने जाकर विवाह से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। जब पीडि़ता बयान दर्ज करा रही थी, उसी दौरान इसके परिजनों ने इसे डरा कर जान से मारने की धमकी भी दी थी। यहां मनीष पोरवाल जीनवाला भी आया और बोला कि तू पुलिस के सामने बयान बदल दे वरना हम तूझे गोली मार देगे। इसी के साथ मायके पक्ष के अन्य लोग भी जान से मारने की धमकी देने लगे। पीडि़ता के अनुसार उसे जावरा के वन स्टाँप सेन्टर भेजा गया, जहां आकर मायके पक्ष और मनीष पोरवाल ने इसे डराया-धमकाया था। इसके बाद जावरा कोर्ट मे मेरे बयान हुये और मुझे वापस वन स्टाप सेन्टर जावरा भेजा जहाँ से मुझे कलेक्टर आफिस वन स्टाप सेन्टर वाले 29 सितम्बर को ले गये थे वहाँ से मै व मोहन बाहर निकले तो शाम करीबन 04.15 बजे कलेक्टर आफिस के बाहर जा रही थी तभी इसके परिजन बोले कि हमारी इच्छा के खिलाफ शादी की है हम तुझे जान से खत्म कर देगे मेरे पति मोहन को मेरे पिता राजु और भाई राहुल कहने लगे की हम तेरे घर की औरतो को उठाकर ले जाएगे तेरे घर मे आग लगा देंगे तुझे जिन्दा जला देंगे तेरी लाश को कही ले जाकर गाड़ देगे।
पीडि़ता के अनुसार हमने हाई कोर्ट में केस लगाया था जिसमे हाई कोर्ट ने हमारे पक्ष में आदेश किया था इसके बाद भी 12 अक्टूबर शाम 04.00 बजे मेरे माता पिता और रिश्तेदार बुआ का लडक़ा संजय एवं काना ने मुझे पकडऩे की कोशिश एवं इतने में मेरी बुआ के लडक़े जितेन्द्र, लोकेन्द्र एवं देवेन्द्र आये इन्होने मेरे व मेर पति के साथ झूमा झटकी की थी। आरोपितों का कहना था कि वह पीडि़ता के परिवार से 10 लाख रुपए वसूलेगे और अगर रुपए नही दिए तो मकान पर कब्जा कर लेगे, ऐसे में पीडि़ता और इसका पूरा परिवार दो माह से बैघर होकर दर दर की ठोकरे खा रहा है।
14 के खिलाफ दर्ज हुआ प्रकरण
पीडि़ता की शिकायत के बाद जावरा शहर पुलिस ने ताबड़तोड़ आरोपित राजू पिता वर्दीचंद खराड़ी,कलाबाई,राहुल,खुशी,कविता,रेखा,गौरी,रामकन्या,संजय,काना,जितेन्द्र, लोकेन्द्र,देवेन्द्र और मनीष के खिलाफ धारा 115 (2),296 (बी), 351 (3) और 3 (5) बीएनसी के तहत कायमी की है।
कोर्ट में अवमानना याचिका दर्ज की थी
उक्त मामले में अधिवक्ता अमित कुमार पांचाल के माध्यम से माननीय उच्च न्यायालय इन्दौर के समक्ष पीडि़ता ने स्वयँ की और लडक़े के परिवार की सुरक्षा की मांग करते हुए याचिका लगाई। इस पर माननीय उच्च न्यायालय के आदेश थे पीडि़तों को पूरा संरक्षण दिया जाए इसके बाद भी पीडि़त दम्पत्ति खुद के घर से ही बेघर होकर भटक रहे हैं। एसपी और थाना प्रभारी को हाइकोर्ट के आदेश के पालन में शिकायत किए जाने के बाद भी कोई कार्यवाही ने होने पर पीडि़तों व्दारा माननीय उच्च न्यायालय में इनके विरुध्द अवमानना याचिका पेश की है, जिसमें शुक्रवार को इन्हें नोटिस जारी किए जाने का आदेश हुआ था।

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